दो लड़कियां हिम्मत न दिखातीं तो सामने न आती ‘अपना घर’ की हैवानियत
रोहतक की श्रीनगर कॉलोनी स्थित अपना घर की छत से कूदकर दिल्ली भाग गईं थीं लड़कियां
छह साल के लंबे इंतजार के बाद आखिर 101 लड़कियों को मिला न्याय
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
शहर के बीचो बीच मौजूद श्रीनगर कॉलोनी में बने शेल्टर होम ‘अपना घर’ की दीवारों के पीछे चल रही हैवानियत कभी सामने ही नहीं आ पाती अगर यहां पर कैद 14 और 15 वर्ष की दो लड़कियां हिम्मत नहीं दिखातीं। दो लड़कियों की हिम्मत का ही नतीजा है कि अपना घर में रोज तिल-तिल मर रहीं सौ से अधिक लड़कियों को न्याय मिला। अपना घर में 10 से 15 वर्ष की लड़कियों को यातनाएं दी जाती थीं। उन्हें भूखा रखा जाता और शारीरिक संबंध बनवाएं जाते थे। यह सब चल रहा था कि कुछ सफेदपोशों की मर्जी से, लेकिन बहादुर लड़कियों की दास्तां सुनने के बाद जब शेल्टर होम में छापे पड़े, तो दरिंदगी और हैवानियत का नाच पूरे देश ने देखा। बुधवार को सीबीआई कोर्ट ने नौ आरोपियों को दोषी ठहराया और इन्हें 24 अप्रैल को सजा सुनाई जाएगी।
अपना घर पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने नौ मई 2012 को छापा मारा था और इस छापे को अपना घर तक पहुंचने वाली थीं वहां से भागी दो लड़कियां। असल में, लड़कियां अपना घर की छत से कूदकर भाग गई थीं, किसी तरह से दोनों दिल्ली पहुंची, जहां कुछ लोगों ने दोनों लड़कियों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के हवाले किया। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की पूछताछ में दोनों ने अपनी आप बीती बताई, जिसके बाद छापे मारे गए। आयोग की टीम ने 10 से 15 वर्ष तक की 100 से अधिक लड़कियों को मौके से छुड़वाया। शेल्टर होम अपना घर चला रहीं जसवंती देवी, उसके दामाद जय भगवान को गिरफ्तार किया गया। लड़कियों ने अपना घर का राज खोलते बताया कि उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था। वहां विदेशी भी आते थे और नग्नावस्था में उनकी परेड कराई जाती थी। उनके वीडियो बनाए जाते थे। गर्भवती होने पर उनका गर्भपात करा दिया जाता था। लड़कियों ने जांच के दौरान बताया कि उन्हें नग्नावस्था में बांधकर बांस से पीटा जाता था। महफिल जमती थी, जिसमें उन्हें शराब पीने के लिए मजबूर किया जाता था। इतना ही नहीं हैवानियत की हद पार कर इनके साथ दुष्कर्म करते वक्त वीडियो बनाए जाते थे।
घटनाक्रम
9 मई 2012 : आयोग ने छापा मारा, सौ से अधिक लड़कियों को मुक्त कराया, अपना घर की संचालिका जसवंती और उसके रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया।
8 जून 2012: हरियाणा सरकार की ओर से अपना घर को सील कर जांच सीबीआई को सौंपी गई।
7 अगस्त 2012 : सीबीआई ने पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में 10 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए।
23 सितंबर 2014 : सीबीआई अदालत ने आरोपियों पर आरोप तय हुए और मुकदमा शुरू हुआ।
14 फरवरी 2018 : सभी गवाही पूरी हुई और अंतिम बहस शुरू हुई।
10 अप्रैल 2018: अंतिम बहस पूरी हुई।
18 अप्रैल 2018: सीबीआई अदालत ने नौ आरोपियों को दोषी करार दिया
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अपना घर मामले की साइड स्टोरी
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रोहतक, नोएडा समेत सभी केंद्र
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आखिरकार अनाथ बच्चियों को मिल ही गया न्याय
सबहेड
विशेष न्यायाधीश जगदीप सिंह यौन शोषण मामले में डेरा प्रमुख को भी सुना चुके हैं सजा
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
रोहतक के अपना घर में यौन उत्पीड़न, मानव तस्करी के अलावा शारीरिक और मानसिक यातनाएं झेलने वाली बेटियों को आखिरकार न्याय मिल ही गया। अनाथ बच्चियों से अमानवीय हरकतें करने वाले आरोपियों को दोषी करार देने वाले विशेष सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश जगदीप सिंह ने ही 25 अगस्त, 2017 को साध्वी यौन शोषण मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया था। इस मामले में 28 अगस्त 2017 को 20 साल की सजा सुनाई गई थी।
अपना घर में रहने वाली बच्चियों और युवतियों को प्रताड़ित किए जाने की शिकायत पर जब छापामारी की गई तो दुष्कर्म, मानव तस्करी, मारपीट, गर्भपात, जबरन काम करवाने सहित तरह-तरह की शारीरिक और मानसिक यातनाएं देने का खुलासा हुआ। इनमें से एक आरोपी रोशनी ने भी एक बच्चे को गोद लिया था। इस घिनौने करतूत के दोषियों को अगले सप्ताह सजा सुनाई जाएगी। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ और जांच के दौरान सामने आया कि अपना घर में बगैर मां-बाप के रहने वाले बच्चों और युवतियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोग ही भक्षक निकले। आरोपियों ने तरह तरह से प्रताड़ित किया, जिसकी शिकायत मिलते ही इस मामले में संज्ञान लिया था। मामले की जांच जून 2012 में सीबीआई को सौंप दी गई थी जबकि अगस्त में इस मामले में पेश किए गए चालान में अपना घर की संचालिका जसवंती देवी को मामले का मुख्य आरोपी बनाया गया। आरोपियों को जब अदालत ने दोषी करार दिया तो उनके रिश्तेदारों और आरोपियों की आंखों से आंसू छलक पड़े। इस मामले में पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में फरवरी, 2018 में अंतिम बहस शुरू हुई थी। पीड़ितों की ओर से दिए बयान और आरोपियों की पहचान के बाद आरोपी सतीश और जय भगवान के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की धारा जोड़ी गई थी। हालांकि आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।