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दो घंटे बाद कह दिया, इस दुनिया में नहीं रहा तुम्हारा बच्चा
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अमर उजाला ब्यूरो
गोहाना। महिला के पति टिंकू ने बताया कि दो घंटे इधर-उधर भटकाने के बाद स्टाफ नर्स ने उन्हे बताया कि उनका बच्चा अब इस दुनिया में नहीं रहा। जिसके बाद परिजनों की आंखों से आंसू बहने लगे और वहां हंगामा शुरू हो गया। उसका आरोप है कि यदि चिकित्सक व स्टाफ नर्स उसकी पत्नी का सही से उपचार करते तो आज उनका बच्चा जीवित होता। उन्होंने बिना नाम के डाक्टर व स्टाफ नर्सों के खिलाफ उनकी लापरवाही से बच्चे की मौत होने का मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
डाक्टरों के बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम, बिसरा जांच को भेजा
नागरिक अस्पताल के तीन चिकित्सकों डॉ. छवि राठी, डॉ. रीटा गोयल व डॉ. दिनेश छिल्लर के बोर्ड ने नवजात के शव का पोस्टमार्टम किया। बोर्ड ने मौत के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और बिसरा जांच के लिए मधुबन भेजा गया है। बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में कोई कार्रवाई हो सकेगी। वहीं पीडित परिवार के लोगों का कहना है कि चिकित्सकों व स्टॉफ नर्सों को बचाने के लिए बिसरा मधुबन भेजा गया है। उनका कहना है कि विभाग अपने कर्मचारियों को बचाने में लगा हुआ है।
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डॉक्टर ने महिला की बता दी गलती
लेबर रूम की इंचार्ज डॉ. पूनम ने अपना व स्टाफ का बचाव करते हुए पूरे मामले के लिए महिला को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि जब महिला की हालत ऐसी थी तो उसे खुद शौचालय में नहीं जाना चाहिए था। जिस दौरान महिला लघुशंका के लिए गई है, उसी समय हो सकता है कि बच्चे की सांस की नली में पानी भर गया। बिसरा रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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महिला के परिजनों ने अपनी शिकायत में किसी का नाम लिखकर नहीं दिया था। उन्होंने केवल डाक्टर व स्टाफ नर्सों की लापरवाही के कारण बच्चे की मौत होने की बात कही है। उसके आधार पर ही मुकदमा दर्ज किया गया है। इसकी जांच शुरू कर दी गई है और इसमें जिसका भी नाम सामने आएगा, उसका नाम शामिल कर लिया जाएगा।
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-कुलदीप देशवाल, एसएचओ सिटी थाना गोहाना
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मामले की गहनता से होगी जांच
इस घटना की गहनता से जांच कराई जाएगी। इस मामले में दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पीड़ित परिवार को न्याय जरूर दिलाया जाएगा और जिसकी लापरवाही के कारण बच्चे की मौत हुई है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को लेकर शासन को सूचित कर दिया गया है।
-डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन सोनीपत।
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