अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। जाट शिक्षण संस्था के महारानी किशोरी कन्या महाविद्यालय में एक महिला की नियुक्ति के लिए नियम-कायदे ताक पर रखे गए हैं। साक्षात्कार के दिन तय हुई परीक्षा में महिला उम्मीदवार को नकल करते पकड़ा गया है। इसके अलावा सीआर पॉलिटेक्निक संस्थान में 48 लाख रुपये का घपला किया गया है। इस मामले में पूर्व प्राचार्य, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट व सुपरिंटेंडेंट शामिल हैं। ये आरोप जाट शिक्षण संस्था के आजीवन सदस्य चंचल नांदल ने लगाए हैं। वे बुधवार को मैना पर्यटन केंद्र में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षा में दूसरे अभ्यर्थियों ने महिला उम्मीदवार को सरेआम नकल करते पकड़ा। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कॉलेज प्रशासन ने अनियमितताएं बरती हैं। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के भी आदेश हैं कि इस तरह नकल करता कोई अभ्यर्थी पकड़ा जाता है तो उसे दोबारा टेस्ट में बैठने की अनुमति नहीं होगी। उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। प्रशासन को इसकी सूचना दिए जाने के बावजूद निष्पक्ष जांच नहीं होना संदेह पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि सीआर पॉलिटेक्निक में 48 लाख रुपये का ईपीएफ घोटाला हुआ है। इसमें वर्ष 1982 से 1992 के बीच 105 कर्मचारियों का ईपीएफ जमा नहीं कराया गया। ईपीएफ नहीं मिलने पर विभाग ने 18 दिसंबर 2004 को 18,03,396 रुपये जमा कराने का निर्देश दिया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की जाट संस्था की ब्रांच में यह राशि जमा करा दी गई। इस बीच वर्ष 1982-1992 के अनेक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके थे। इसके बजाय संस्था के कर्मचारी डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, सुपरिंटेंडेंट व प्रिंसिपल ने किन्हीं और कर्मचारियों के नाम से 18 लाख रुपये जमा करा दिए। संस्था पर लगी पेनल्टी का पैसा भी गैर कानूनी तरीके से कर्मचारियों के खाते से ले लिया गया। जबकि पेनल्टी देने का हक नियोक्ता का है। वर्ष 2012-13 में एक करोड़ 36 लाख रुपये किन्हीं और कर्मचारियों के अकाउंट में आरटीजीएस के माध्यम से सेंट्रल बैंक की ब्रांच में रिफंड आ गया। इस एक करोड़ 36 लाख रुपये में से 48 लाख रुपये अतिरिक्त थे। उस समय के कर्मचारियों ने बेयरर चेक के रूप में या अपने नाम से यह राशि निकलवा ली। इस घोटाले का पता चलने पर पंचायत हुई। पंचायत में एक कर्मचारी ने रुपये वापस देने की बात कही। उसने अपनी गलती मानते हुए 20 लाख रुपये लौटाए। इसमें से आठ लाख रुपये जाट शिक्षण संस्था के खाते में व 12 लाख 60 हजार रुपये 32 कर्मचारियों के खातों में जमा करा दिए। कानूनन यह गलत है। यह राशि प्रिंसिपल खाते में जानी थी या ईपीएफ में। दूसरे कर्मचारी ने अपने हिस्से के करीब 22-23 लाख रुपये देने से मना कर दिया। अब डिप्टी सुपरिंटेंडेंट सेवानिवृत्त हो चुके हैं। डिप्टी सुपरिंटेंडेंट अब सुपरिंटेंडेंट पदोन्नत हो चुके हैं। उसे पदमुक्त किया जाए व इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराते हुए प्रिंसिपल समेत अन्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
संस्था के वित्तीय गड़बड़ी मामले की जांच चल रही है। टीम निष्पक्ष तरीके से अपना काम कर रही है। नियुक्ति मामले को लेकर एक विवाद एमकेजेके कॉलेज में सामने आया था। वहां परीक्षा में नकल की शिकायत थी। इस मामले में खुद मौके पर जाकर स्थिति जानी। किसी तरह की धांधली की बात नहीं है। प्रशासन हर मामले पर नजर रखे हुए हैं। कहीं भी किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।
-अजय कुमार, एडीसी एवं प्रशासक, जाट शिक्षण संस्था