नगर निगम ने सरकारी एजेंसी हरसैक से 142 अवैध कॉलोनियों का सर्वे कराना तय किया है। सर्वे का अंतिम फैसला आगामी सप्ताह में होगा। वहीं, रिकॉर्ड के अनुसार निगम ने दो बार हरसैक से सर्वे कराया, जबकि नगर परिषद ने निजी एजेंसी से।
नगर निगम की सीमा का तेजी से विस्तार होने की वजह से अवैध कॉलोनियों भी तेजी से बस रहीं हैं। निगम क्षेत्र में 142 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है। इनके खिलाफ निगम का चल रहा ध्वस्तीकरण अभियान रोक दिया गया है, क्योंकि फिर से अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। शासन से इन कॉलोनियों का सर्वे करने के आदेश मिल चुके हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अगले सप्ताह तक सर्वे कराने वाली कंपनी का निर्धारण कर लिया जाएगा। इसके लिए निगम प्रशासन ने सरकारी एजेंसी हरसैक से सर्वे कराने का फैसला लिया है, जिस पर अंतिम फैसला बाकी है।
कब कितनी कॉलोनियां हुई वैध
सर्वे वर्ष वैध कॉलोनियां
2008-09 34 (2013, निगम)
2015-16 99 (2018, निगम)
2003 70 (2004, नप)
अवैध कॉलोनी की वैध होने की प्रक्रिया
अवैध कॉलोनियों का सर्वे होता है। सर्वे करने वाली कंपनी कॉलोनी में हुए निर्माण, सुविधाओं और प्रस्तावित रास्तों आदि का सर्वे करती है। सर्वे रिपोर्ट निगम हाउस की मीटिंग में स्वीकृत होना जरूरी है। सदन से स्वीकृति के बाद रिपोर्ट उपायुक्त से पास जाती है। उपायुक्त अपनी रिपोर्ट के साथ अवैध कॉलोनियों को वैध करने की संस्तुति करते हैं। इसके बाद शासन स्तर से अंतिम मुहर लगाई जाती है।
फिलहाल निगम ने रोका ध्वस्तीकरण का अभियान
मुख्यालय से सर्वे कराने का आदेश आने के बाद निगम की बिल्डिंग शाखा ने अवैध कॉलोनियों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी तरह से रोक दी है। निगम अधिकारी का कहना है कि जब अवैध कॉलोनी को वैध करने के लिए सर्वे कराना है, तो ध्वस्तीकरण नहीं कर सकते हैं।
इन बिंदुओं पर होगा अवैध कॉलोनियों का सर्वे
अवैध कॉलोनी में कितना निर्माण कार्य हो चुका है। कितने प्लॉटों की बिक्री हो चुकी है। कितने लोगों ने नींव भरवाकर निर्माण शुरू कर दिया है। आवागमन के लिए कितने फुट का रोड बनाया है। सीवर व जलनिकासी की क्या व्यवस्था की है। पेयजल की व्यवस्था किस तरह से होगी।
निगम क्षेत्र में बनीं अवैध कॉलोनियाें का सर्वे कराया जाएगा। निगम ने हर बार सरकारी एजेंसी हरसैक से सर्वे कराया है, इसलिए इससे ही कराने पर अंतिम फैसला अगले सप्ताह होगा। सर्वे रिपोर्ट निगम हाउस में स्वीकृत होने पर उपायुक्त के पास जाएगी। उपायुक्त अपनी रिपोर्ट लगाकर शासन को भेजेंगे।
- जितेंद्र कुमार, एटीपी, नगर निगम, रोहतक