प्रदेश की भाजपा सरकार ने शहरों में पार्किंग स्थलों की समस्या के समाधान के लिए नया फार्मूला निकाला है। अब कोई भी व्यक्ति जिसके पास 500 वर्ग मीटर का प्लॉट है, वह स्थानीय स्तर पर नगर निगम, नगर परिषद या नगर पालिका से लाइसेंस लेकर पार्किंग शुरू कर सकता है। इसके लिए एक साल की 100 रुपये प्रति वर्ग मीटर फीस जमा करवानी होगी। इस आशय का आठ मार्च को ही शहरी निकाय विभाग के मुख्य सचिव आनंद मोहन शरण ने पत्र जारी किया है।
मुख्य सचिव की ओर से हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट 1973 के सेक्शन 66-ए और नगर निगम एक्ट 1994 के सेक्शन 42 (17) के तहत स्पष्ट किया गया है कि विभाग ने शहरों के अंदर वाहनों की पार्किंग को लेकर नई पॉलिसी लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत नगर निगम, नगर परिषद व नगर पालिकाओं की सीमा में निजी पार्किंग स्थल खोले जाएंगे। ताकि पार्किंग की समस्या का समाधान हो सके। क्योंकि लंबे समय से शहरों के अंदर पार्किंग स्थलों की कमी महसूस की जा रही है। स्थानीय प्रशासन के पास न तो इतनी जमीन है और न ही स्टाफ है कि ज्यादा से ज्यादा पार्किंग स्थल संचालित किए जा सकें। ऐसे में आम नागरिक निजी पार्किंग स्थल खोल सकते हैं।
रेट तय करेगा निगम, 500 वर्ग मीटर का प्लॉट अनिवार्य
पॉलिसी के तहत पार्किंग स्थल खोलने के लिए 500 वर्ग मीटर का प्लॉट होना अनिवार्य है। अगर किसी व्यक्ति के पास इससे कम एरिया है तो वह अपने साथ लगते प्लॉट मालिक से बात करके संयुक्त तौर पर आवेदन कर सकता है। वाहन मालिकों से कितना किराया वसूला जाएगा यह आवेदक को लिखकर देना होगा जिसके बाद स्थानीय नगर निगम, नगर परिषद या नगर पालिका उस पर निर्णय लेगा। साथ ही किराए की सूची पार्किंग स्थल के बाहर नोटिस बोर्ड लगाकर चस्पा करनी होगी।
50 वर्ग मीटर से ज्यादा बड़ा नहीं होगा वॉश, टिकट या गार्ड रूम
शर्तों के तहत पार्किंग स्थल के अंदर वॉश रूम, टिकट रूम या गार्ड रूम 50 वर्ग मीटर से ज्यादा बड़ा नहीं होगा। न ही लाइसेंस को चेंज ऑफ लैंड माना जाएगा। साथ ही यह लाइसेंस केवल एक साल के लिए जारी किया जाएगा। अगले साल अगर संबंधित व्यक्ति या कंपनी काम जारी रखना चाहती है तो नए सिरे से लाइसेंस लेना होगा।
शर्त तोड़ने पर लाइसेंस होगा रद्द
नियमों के तहत आवेदनकर्ता को शपथ पत्र देना होगा कि उसके द्वारा पार्किंग स्थल संचालन करने से कोई जनहित प्रभावित नहीं होगा। साथ ही सड़क के ऊपर वाहन खड़े नहीं किए जाएंगे। अगर शर्त तोड़ी गई तो स्थानीय प्रशासन पहले नोटिस देकर 5 हजार रुपये तक जुर्माना लगा सकता है। फिर भी न मानने पर दूसरा नोटिस देकर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
प्लॉट का रिकॉर्ड भी लगाना होगा साथ
आवेदनकर्ता अगर अपने प्लॉट को पार्किंग स्थल के तौर पर प्रयोग करना चाहता है तो उसने आवेदन पत्र के साथ प्लॉट की रजिस्ट्री संबंधी कागजात भी लगाने होंगे। आवेदन निगम आयुक्त, नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी या नगर पालिका सचिव को किया जा सकता है।
आवेदक को लिखकर देने होंगे पार्किंग के रेट
पॉलिसी के तहत पार्किंग स्थल के लिए आवेदन करते समय आवेदक यह भी लिखकर देगा कि वह दुपहिया वाहन के लिए कितने व चार पहिया वाहन के लिए कितने पैसे वसूल करेगा। निगम, नप या नपा के सहमत होने पर ही लाइसेंस जारी किया जाएगा। ऐसे में अलग-अलग पार्किंग स्थल का अलग-अलग रेट हो सकता है। यह पार्किंग स्थल की लोकेशन पर निर्भर करेगा।
भीड़भाड़ वाले एरिया में होगा फायदा
सरकार की पार्किंग पालिसी का सबसे ज्यादा फायदा शहरों के अंदर भीड़भाड़ वाले बाजारों में होगा, जहां सरकारी जमीन के अभाव में स्थानीय प्रशासन पार्किंग स्थल नहीं खोल पा रहा है। रोहतक शहर में हिसार मोड़ से लेकर दिल्ली बाईपास चौक तक कई जगह निजी प्लॉट खाली पड़े हैं। इससे एक तो युवाओं को रोजगार मिलेगा, दूसरा वाहन खड़ा करने की समस्या का समाधान होगा। साथ ही लाइसेंस फीस से निगम, नप व नपा का लाखों रुपये की आय होगी।
विभाग के मुख्य सचिव का पत्र आया है। जो व्यक्ति शर्तों को पूरा करता है, वह रिकॉर्ड के साथ निजी पार्किंग स्थल खोलने के लिए आवेदन कर सकता है।
केके वार्ष्णेय, एटीपी, नगर निगम।
हर शहर में वाहनों की पार्किंग की समस्या है। जगह-जगह बाजारों में निजी प्लॉट खाली पड़े हैं। ऐसे में सरकार ने निजी पार्किंग स्थल संचालन के लिए लाइसेंस जारी करने का फैसला किया है। इससे न केवल सरकार को आमदनी होगी, बल्कि पार्किंग की समस्या के समाधान के साथ-साथ युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
कविता जैन, केबिनेट एवं शहरी निकाय मंत्री