रोहतक की आंखें अब कोहराम देखकर हंसी भूल गई हैं। किसी को याद नहीं पड़ रहा है कि उन्होंने डी-पार्क और पावर हाउस पर आखिरी बार खुशहाली की हंसी कब देखी थी। शहर की नाम कर्फ्यू में लगातार तीसरे दिन रोहतक पर उपद्रवियों का कहर बरपा। शहर में सेना की मौजूदगी के बाद रविवार सुबह अशोका चौक से लेकर एमडीयू तक और शीला बाईपास तक का इलाका धधकता मिला।
दिन चढ़ने के साथ ही सेना ने उपद्रवियों को सड़काें से उठाना शुरू किया, लेकिन आर्मी इस बार भी जाट कॉलेज से आगे नहीं बढ़ सकी। आर्मी के पीछे हटने और मोर्चा नहीं लेने के कारण शहर के सीआईए थाने को फूंक दिया गया। सोनीपत रोड पर स्कूलों और शोरूम को आग के हवाले कर दिया गया। वहीं, चंडीगढ़ में बैठे प्रदेश के आला अधिकारी और सरकार हालात का जायजा लेते रहे।
राजधानी में डीजीपी यशपाल सिंघल ने दोपहर करीब 12 बजे प्रेस को संबोधित किया। कहा, इस बात की खुशी है कि रोहतक में हालात काबू में आ गए हैं। लेकिन उनका यह आकलन गलत रहा और कलानौर कस्बे के पूरे बाजार को आग के हवाले कर दिया गया। पेट्रोल बम लेकर पहुंचे उपद्रवियों ने एक-एक दुकान को खाक कर दिया। हालांकि बीच-बीच में कुछ दुकानों को छोड़ भी दिया गया।
करीब 100 दुकानों में हुई आगजनी का मंजर ऐसा था कि पास खड़ा आदमी दूसरे आदमी को धुएं में देख नहीं पा रहा था। आगजनी से पहले जमकर लूटपाट की गई और कंप्यूटर तक उठा लिए गए। शुरुआत कस्बे के कॉलेज मोड़ स्थित सत जिंदा कल्याणा कॉलेज से की गई। देखते ही देखते जिले के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान को आग के हवाले कर दिया गया। यहां खड़ी प्रोफेसर और लेक्चरर की गाड़ियां भी खाक हो गईं। कस्बे में स्थित भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश भाटिया की हार्डवेयर की दुकान को भी फूंक दिया गया।
इससे बड़ी दुर्भाग्य की बात क्या हो सकती है कि चंडीगढ़ में अधिकारी अपने कार्यालयों के अंदर बैठकर ही स्थिति नियंत्रण होने का दावा तक करते रहे। जिन कंधों पर आमजन को बचाने की जिम्मेदारी थी, उनके बयानों से हालात काबू किए हों या नहीं, लेकिन इन बयानों ने आम आदमी के अंदर गुस्सा जरूर भर दिया।
उसी समय रोहतक शहर में सीआईए वन के थाने में उपद्रवी घुस गए और वहां तोड़फोड़ करने के बाद आग लगा दी गई। शीला बाईपास से सेक्टर-एक तक की दर्जनों दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। गाड़ी का शोरूम जलाया गया तो एक गोदाम को जला दिया गया। उस गोदाम में कई गैस के सिलेंडर रखे हुए थे जो आग लगने पर फट गए। इससे आसपास रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई और वह अपने जानकारों के यहां चले गए।
इसके बाद भी उपद्रव नहीं थमा और उपद्रवियों ने सोनीपत रोड पर कई बिल्डिंग व गाड़ियों में आग लगा दी। वहीं झज्जर में जातीय हिंसा शुरू हो गई और वहां कई लोगों की हिंसा में मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में घायल हो गए। इतना कुछ होने के बाद भी पहले गृह सचिव पीके दास ने बयान दिया कि प्रदेश में स्थिति पूरी तरह से कंट्रोल में है और अब किसी भी जगह उपद्रव नहीं हो रहा है।
यह रिपोर्ट उन्होंने केन्द्र को भेजने की बात तक कही। वहीं डीजीपी यशपाल सिंघल ने कहा कि यह बड़ी खुशी की बात है कि सेना को लगाने का असर दिख रहा है और स्थिति सामान्य हो गई है। कहा कि सेना और पुलिस के मिलकर काम करने से यह फायदा मिला है। इस तरह सरकार के दो बड़े अधिकारियों ने अपने कार्यालय में बैठकर ही पूरे प्रदेश में शांति होने का दावा कर दिया। जबकि कई जिलों में लगातार उपद्रव मचाया जा रहा था और वह हिंसा की आग में झुलस रहे थे।