बैंकें बंद, एटीएम में भी कैश खत्म
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नोटबंदी के बाद छठे दिन सोमवार को भी लोग पैसे के लिए एटीएम दर एटीएम भटकते रहे। गुरु पर्व के उपलक्ष्य में बैंक और डाकघर बंद होने से लोगों को नकदी निकालने के लिए एटीएम का ही सहारा था। शहर में मौजूद करीब 200 एटीएम में से केवल 10 में से ही पैसे निकले। इनमें से भी कई में तो एक से डेढ़ घंटे में ही नकदी खत्म हो गई। कुछ एटीएम में दोबारा रुपये डाले गए, लेकिन वह भी अपर्याप्त साबित हुए। अधिकतर एटीएम से 2500 रुपये नहीं निकले। लोगों को दो-दो हजार रुपये निकालकर ही संतोष करना पड़ा।
बैंक और डाकघर बंद होने की वजह से लोग एटीएम से नकदी निकालने के लिए सुबह ही घरों से निकल पड़े और शाम तक भटकते रहे। घंटों कतार में इंतजार करने के बावजूद लोगों के हाथ में पैसे की जगह परेशानी ही आई। ये हालात तब हैं, जब जिले में राष्ट्रीयकृत, निजी और कोआपरेटिव बैंक की करीब 96 शाखाएं हैं और लगभग 200 एटीएम हैं। नई करेंसी नहीं पहुंचने और एटीएम अपडेट नहीं होने की वजह से केवल एसबीआई, केनरा बैंक, यूनियन बैंक और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के ही करीब 10 एटीएम से पैसे निकले। लोग सुबह नौ बजे से पहले ही एटीएम पहुंच गए थे।
हालत यह थी कि एटीएम में पैसे डेढ़ से दो घंटे में ही खत्म हो जाते थे। गोहाना अड्डा स्थित एसबीआई का एटीएम सुबह 11:30 बजे तो पॉवर हाउस समीप यूनियन बैंक का एटीएम दोपहर 1:15 बजे ही कैश लेस हो गया। यहां से लोग जब एसबीआई की मुख्य शाखा में पहुंचे तो वहां के भी एटीएम में कैश खत्म हो चुका था। शाम 4:30 बजे उसमें कैश डाला जा सका। तब तक लोग कतार में खड़े होकर इंतजार करते रहे। पॉवर हाउस के समीप केनरा बैंक का भी यही हाल रहा, लेकिन दो घंटे बाद एटीएम में कैश दोबारा डाला दिया गया।
घर से दूर रह रहे विद्यार्थी ज्यादा परेशान
पुराने नोट बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी उन विद्यार्थियों हो रही है जो अपने घरों से दूर दूसरी जगहों पर पढ़ रहे हैं। इस वजह से उनके अभिभावक भी तनाव में हैं कि बच्चों तक पैसे कैसे पहुंचाएं। क्योंकि उनके खाते में बिना शपथ पत्र के पैसे जमा नहीं करा सकते हैं। जिन विद्यार्थियों के पास पैसे थे, वे पुराने थे। जिन्हें वे अपने दोस्तों की सहायता से बैंक में जमा करा चुके हैं।