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दिल को फिर दी दम: जहर खाने से 20 प्रतिशत रह गई थी हृदय की कार्यक्षमता, 48 घंटे में 45 प्रतिशत तक पहुंचाई

Thu, 08 Oct 2026 10:33 AM IST
Akash Dubey अभिषेक कीरत, रोहतक

सार

निजी अस्पताल ने जहर खाने वाले मरीज को ईसीपीआर/वीएईसीएमओ से नया जीवन दिया। 48 घंटे में दिल की पंपिंग क्षमता 20 से 45 फीसदी हुई। केस पीजीआई रोहतक में पुरस्कृत हुआ।
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जहर से थमने लगी थीं धड़कनें - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रोहतक स्थित निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने जहर खाने वाले एक 47 वर्षीय मरीज को अत्याधुनिक एक्स्ट्राकॉर्पोरियल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (ईसीपीआर) व वीएईसीएमओ तकनीक के जरिए नया जीवन प्रदान किया है। जहर खाने से मरीज का दिल केवल 20 प्रतिशत कार्य करने लगा था लेकिन आधुनिक ईसीपीआर व वीएईसीएमओ की वजह से 48 घंटे में दिल की पंपिंग क्षमता 45 प्रतिशत तक पहुंच गया। पीजीआई रोहतक के राष्ट्रीय हृदय सम्मेलन क्रिसकॉन 2026 में इस केस स्टडी को पुरस्कृत भी किया गया है।

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अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक डॉ. जय प्रकाश ने बताया कि है कि उत्तर भारत में इससे पहले प्रकाशित शोध में इस तकनीक से केवल 22 से 40 प्रतिशत तक रिकवरी देखी गई है। पहली बार रिकवरी 45 प्रतिशत तक पहुंची है। पीजीआई के राष्ट्रीय हृदय सम्मेलन क्रिसकॉन 2026 में अस्पताल की डॉ. नताशा बस्सी की तरफ से प्रस्तुत इस शोध अध्ययन को दूसरा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है। इस केस की सफलता में डॉ. नताशा बस्सी के साथ कंसल्टेंट्स डॉ. जय प्रकाश, डॉ. गौरव आर्य, डॉ. कीर्ति, डॉ. एकल अरोड़ा, डॉ. अनूप दांगी, डॉ. दीपिका, डॉ. निशा, डॉ. गौरव अरोड़ा का भी सहयोग रहा।   

गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था मरीज, कार्डियक अरेस्ट भी आए
शोध पत्र के अनुसार, डायबिटीज व हाइपरटेंशन से ग्रस्त 47 वर्षीय मरीज को जहर के सेवन के बाद दूसरे अस्पताल से रेफर किया गया था। अस्पताल पहुंचने पर मरीज के हाथ-पैर ठंडे पड़ चुके थे। ब्लड प्रेशर भी ज्यादा घट चुका था। हृदय गति 47 प्रति मिनट रह गई थी। जांच करने पर पता चला कि मरीज का दिल बेहद कमजोर हो चुका था और केवल 20 प्रतिशत ही काम कर रहा था।

पारंपरिक सीपीआर विफल होने पर ईसीपीआर का लिया सहारा 
डॉक्टर का कहना है कि लगातार इलाज के बावजूद मरीज की स्थिति बिगड़ती गई व उसे कार्डियक अरेस्ट (दिल की धड़कन रुकना) भी आ गया। मानक सीपीआर देने के बावजूद मरीज के दिल की धड़कन प्राकृतिक रूप से वापस नहीं आ सकी। जहर के कारण दिल पर पड़े इस प्रभाव को ठीक होने योग्य मानते हुए डॉक्टरों की टीम ने तुरंत जांघ की नसों के जरिए मशीन लगाकर ईसीपीआर प्रक्रिया शुरू की। ईसीएमओ मशीन ने मरीज के शरीर में लगभग 3-3.2 लीटर प्रति मिनट की दर से रक्त संचार बहाल किया। इससे शरीर के अंगों को तुरंत ऑक्सीजन व ब्लड मिलना शुरू हो गया।
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48 घंटे के भीतर दिल की कार्यक्षमता में सुधार, 45 प्रतिशत सुधरी हालत
ईसीएमओ सपोर्ट मिलते ही मरीज के दिल में तेजी से सुधार देखा गया। इकोकार्डियोग्राफी जांच में मरीज की हृदय की पंपिंग क्षमता अगले दिन 20 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत व महज 48 घंटे के भीतर 45 प्रतिशत तक पहुंच गई। हृदय की स्वाभाविक क्षमता वापस आने पर मरीज को ईसीएमओ सपोर्ट व वेंटिलेटर से हटाकर उसे जीवनदान दिया गया। हालांकि इलाज के दौरान मरीज को एनीमिया, पेट में ब्लीडिंग और बाएं हाथ की नसों में थक्का जमने  जैसी जटिलताओं का सामना भी करना पड़ा। मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल टीम की देखरेख में इन सभी समस्याओं का सफल इलाज किया गया।
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