अपनी मांगाें को लेकर देशभर के ग्रामीण बैंकाें के हजाराें कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर रहेंगे।
नई दिल्ली में केंद्रीय लेबर कमिश्नर की मध्यस्थता में ग्रामीण बैंक कर्मचारियाें एवं केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियाें के बीच होने वाली वार्ता विफल होने से हड़ताल की स्थिति बनी है।
सोमवार को इस बैठक में केन्द्र सरकार का कोई नुमाइंदा ही नहीं पहुंचा।
ग्रामीण बैंक कर्मचारी यूनियन के राष्ट्रीय सचिव योगेश शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार ग्रामीण बैंक के कर्मचारियाें के साथ भेदभाव कर रही है और निजीकरण की ओर धकेलने की कोशिश कर रही है। रोहतक में मानसरोवर पार्क के पास स्थित बैंक के मुख्यालय में बैंक कर्मचारी इकट्ठा होकर प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीण बैंक की देश भर में करीब 600 ब्रांच है और 2700 से अधिक कर्मचारी है।
ये हैं कर्मचारियाें की मांगें
1. कर्मचारियाें को पेंशन दी जाए।
2. हाल ही में हुए सरकार ने जो बैंकिंग समझौता किया है, उसमें ग्रामीण बैंक को शामिल किया जाए।
3. एस.के.मित्रा कमेटी की सिफारिशाें को दरकिनार किया जाए।
4. ग्रामीण बैंक को निजीकरण की तरफ भेजने वाले आरआरबी संशोधन को वापिस लिया जाए।
5. वेतन में वृद्धि की जाए।
10 हजार करोड़ का कामकाज होगा प्रभावित
एक दिन की हड़ताल से देश भर में तकरीबन 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कामकाज प्रभावित होगा। हरियाणा की बात की जाए तो आधे जिलाें की क्लियरिंग पंचकूला से होती है और आधे जिलाें की दिल्ली से। ऐसे में अगर पूरे देश में हड़ताल रहेगी तो सारी क्लियरिंग भी रुक जाएगी। इससे तकरीबन 10 हजार करोड़ का कामकाज ठप होना तय है।
‘कोई भी कर्मचारी हड़ताल करके खुश नहीं होता, लेकिन सरकार की भेदभाव पूर्ण नीति ने इसके अलावा कोई चारा नहीं छोड़ा है।’
योगेश शर्मा, राष्ट्रीय सचिव, ग्रामीण बैंक कर्मचारी यूनियन।