जींद। जिला में कई दिनों से एक्यूआई का स्तर खतरनाक श्रेणी में बना हुआ है लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा। सोमवार एक्यूआई 288 दर्ज किया गया। बढ़ते प्रदूषण को लेकर लोग चिंतित हैं लेकिन प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम उठता दिखाई नहीं दे रहा।
प्रदूषण से लोगों को खांसी, अस्थमा, आंखों में जलन, सिर दर्द और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
पिछले सप्ताह शहर के कई इलाकों में प्रदूषण को नियंत्रण में लाने के लिए सीमित स्तर पर पानी छिड़काव शुरू करवाया गया था लेकिन यह प्रक्रिया केवल तीन दिनों के बाद ही बंद कर दी गई। इसके बाद धूलकणों की मात्रा और बढ़ने लगी जिससे वायु गुणवत्ता और भी ज्यादा खराब हो गई।
शहर में जगह-जगह निर्माण कार्य जारी हैं जिन पर ढकाव नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में धूल उड़ रही है। कई मुख्य सड़कों की हालत भी खराब है। दिनभर धूल उड़ती रहती है।
प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरियों पर हो कार्रवाई
जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित कई फैक्टरियां वायु प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं कर रही हैं। धुआं और रासायनिक गैसें बिना रोक-टोक वातावरण में छोड़ी जा रही हैं। प्रदूषण बोर्ड और प्रशासनिक टीमें निरीक्षण के लिए नहीं आती हैं। इसके कारण औद्योगिक इकाइयां बिना किसी भय के संचालन में लापरवाही बरत रही हैं। नागरिकों ने मांग की है कि पानी छिड़काव नियमित रूप से करवाया जाए। निर्माण स्थलों की निगरानी की जाए और प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
वर्जन
जब तक प्रदूषण का स्तर सामान्य नहीं होता लोगों को मास्क का प्रयोग करना चाहिए। धूल से बचना चाहिए। छोटे बच्चों व बुजुर्गों को ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। एक्यूआई का स्तर जिले में सामान्य नहीं है। इसके कारण खांसी, जुखाम समेत सांस के रोगियों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस नागरिक अस्पताल जींद।