04सीटीके06 संडे पाठशाला के दौरान बच्चों को पढ़ाती कन्हेली की अनीता। स्रोत : स्वयं
रोहतक। ज्ञान बांटने से ज्ञान बढ़ता है और कहा जाता है कि सेवा ही धर्म है। इसी सेवा भाव से कन्हेली अनीता 16 साल से निरंतर गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा दे रही हैं।
अनीता 10वीं कक्षा से एमटीएफसी (मेक द फ्यूचर ऑफ कंट्री) संस्था के साथ जुड़कर गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाए हुए हैं।
14 साल की उम्र में अनीता ने स्वयंसेविका के रूप में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और लगातार अपनी पढ़ाई के साथ लगभग 4500 बच्चों को शिक्षित कर मुख्य धारा में जोड़ चुकी हैं। फिलहाल, पीएचडी की पढ़ाई भी कर रही हैं। अनीता प्रत्येक रविवार को संडे पाठशाला भी चलाती है जोकि एमटीएफसी संस्था की ही एक गतिविधि का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि नेहरू काॅलोनी में लगाई जाने वाली संडे पाठशाला में करीब 45 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। अनीता एमटीएफसी से कोई रुपये नहीं लेतीं, बल्कि प्रिटिंग कार्य कर अपना खर्चा चला रही हैं।
अनीता का कहना है कि यदि बच्चे पढ़ेंगे तो समाज से आपराधिक गतिविधियां स्वयं ही समाप्त हो सकती हैं क्योंकि, ऐसे बच्चे ही अशिक्षा व अज्ञानता के कारण आपराधिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। इसकी प्रेरणा एमटीएफसी संस्था के संस्थापक नरेश ढल से ली। संवाद
04सीटीके06 संडे पाठशाला के दौरान बच्चों को पढ़ाती कन्हेली की अनीता। स्रोत : स्वयं