बिहार में जातिगत जनगणना का परिणाम घोषित होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी हर राज्य में इसकी मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष तो राजस्थान समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री का नाम लेकर अपनी पार्टी को पिछड़ों का हमदर्द घोषित करने से नहीं चूक रहे। ऐसे में बाबा बालकनाथ को विधानसभा चुनाव में चेहरा बनाकर भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग के मामले में बड़ा दांव चल दिया है। बाबा को आगे करने से कांग्रेस के पिछड़े कार्ड की काट हो जाएगी और उनकी सर्वसमाज में स्वीकार्यता को पार्टी भुना सकेगी।
अस्थल बोहर मठ के महंत बाबा बालकनाथ से पहले महंत श्रयोनाथ और महंत चांदनाथ राजनीति में उतर चुके हैं। 1967 में हरियाणा के पहले विधानसभा चुनाव में किलोई हलके से मस्तनाथ मठ के महंत श्रयोनाथ व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता रणबीर सिंह हुड्डा के बीच मुकाबला हुआ। इसमें महंत निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विजयी रहे।
हालांकि एक साल बाद मध्यावधि चुनाव में रणबीर सिंह हुड्डा ने महंत श्रयोनाथ को हरा दिया। 1972 में महंत श्रयोनाथ ने पिछली हार का बदला लेते हुए रणबीर सिंह हुड्डा के बेटे कैप्टन प्रताप सिंह को हरा दिया था। बाबा बालकनाथ के गुरु महंत चांदनाथ ने 2004 के उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर राजस्थान की बहरोड़ सीट से चुनाव लड़ा और पार्टी के बागी जसवंत सिंह यादव को 13 हजार वोटों से हराया।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने महंत चांदनाथ को अलवर से टिकट दिया। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता जितेंद्र सिंह को हराया। 2017 में महंत चांदनाथ के निधन के बाद उनके शिष्य और मठ के गद्दीनशीन महंत बालकनाथ ने अलवर से लोकसभा चुनाव लड़ा और विजयी रहे।