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30 साल बाद आज सूर्यदेव का पुत्र शनिदेव से होगा मिलन

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रोहतक। आज मकर संक्रांति पर्व है और वर्ष 1993 के बाद पहली बार सूर्य और शनि एकसाथ मकर राशि में विराजमान होंगे। क्योंकि शनि 30 साल में अपने राशि चक्र को पूरा करता है। इसलिए सूर्य का अपने पुत्र शनि से 30 साल बाद मिलन होगा। यह जानकारी दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज मिश्र ने दी।
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पंडित मनोज ने बताया कि सूर्य-शनि का दुर्लभ संयोग मिथुन, सिंह, धनु और मीन राशि वालों को खास लाभ देगा। मकर संक्रांति का त्योहार पौष महीने की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाई जाती है। इस पर्व को गुजरात में उत्तरायण, पूर्वी उत्तर प्रदेश में खिचड़ी, असम में इस दिन को बिहू और दक्षिण भारत में इस दिन को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्यदेव उत्तरायण हो जाते हैं और कहा जाता है कि इसी दिन से सर्दियां कम होने लगती है और दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।
पर्व पर जपे सूर्य मंत्र
मकर संक्रांति पर सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है। इस दिन सभी तरह के शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं। इस दिन गंगा स्नान, दान और सूर्य उपासना करनी चाहिए। स्नान के बाद सूर्यदेव को ‘सूर्याय नम:’, ‘ऊं ह्रीं ह्रीं सूर्याय नम:’, ‘ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्तया, गृहाणार्घय दिवाकर’ मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।
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मकर संक्रांति की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर अपने पास स्थित किसी पवित्र नदी में या पानी में गंगा जल डाल कर स्नान करें। इसके बाद साफ वस्त्र पहनकर तांबे के लोटे में पानी भर लें और उसमें काला तिल, गुड़ का छोटा सा टुकड़ा और गंगाजल लेकर सूर्यदेव के मंत्रों का जाप करते हुए अर्घ्य दें। सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ ही शनिदेव को भी जल अर्पित करें और शनि से जुड़े हुए मंत्रों का जाप करें। इसके बाद जरूरतमंदों को तिल और खिचड़ी का दान करें।
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