रोहतक। कोरोना एक बार फिर बेलगाम हो चला है। इसके मद्देनजर एक जनवरी से मास्क की अनिवार्यता और टीकाकरण प्रमाण पत्र दिखाने के सख्त निर्देश दिए गए थे लेकिन पहले दिन ही निर्देशों की धज्जियां उड़ती दिखाई दी। लोग बेरोकटोक सार्वजनिक स्थलों पर आते-जाते रहे। यहां न किसी ने मास्क लगाने को कहा न टीकाकरण प्रमाण पत्र जांचा। शासन-प्रशासन के इन निर्देशों का शायद ही कहीं पालन हुआ हो। अमर उजाला ने शनिवार को पीजीआई, सिविल अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व कुछ बाजारों का दौरा कर प्रशासनिक व्यवस्था का जायजा लिया तो यह सच सामने आया।
शनिवार सुबह करीब नौ बजे से ही पीजीआई की ओपीडी में मरीज इलाज कराने पहुंचने लगे। इनमें से ज्यादातर के पास मास्क ही नहीं था। बगैर मास्क ओपीडी में प्रवेश करने वालों को सुबह कुछ देर के लिए गार्डों ने जरूर टोका। सुबह 11 बजे के बाद यह टोकना भी बंद हो गया। इसके बाद लोग बेरोकटोक आते जाते रहे। इन लोगों से किसी ने टीकाकरण की पुष्टि नहीं की। यही हाल सिविल अस्पताल का नजर आया। यहां सुबह से ही लोग बगैर किसी जांच या रोकटोक के आए। बगैर मास्क व वैक्सीन लगवाए प्रशासनिक रोक के दावे हवाई साबित हुए।
तीसरी लहर से बचने को जारी की है गाइड लाइन
कोरोना की तीसरी लहर के खतरे का अंदेशा भांपते हुए सरकार ने गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश से पहले टीकाकरण कराने व मास्क लगाना अनिवार्य करते हुए नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई किए जाने की सख्त हिदायत जारी की गई है। सरकार की गाइड लाइन पर शुक्रवार को उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने भी सख्ती से आदेशों का पालन कराने के निर्देश जारी किए थे।
वहीं रोडवेज डिपो महाप्रबंधक ने भी बगैर टीकाकरण की पुष्टि के बस स्टैंड में किसी को भी प्रवेश नहीं करने देने का दावा किया था। एडवांस टिकट विंडो पर बुकिंग नहीं होगी। स्टैंड पर चेकिंग करने के लिए भी टीमें लगेंगी। जबकि ऐसा कुछ नजर नहीं आया। कर्मचारियों की जीएम के निर्देशानुसार ड्यूटियां जरूर लगी। बस स्टैंड के प्रवेश द्वारों पर जांच के लिए तैनात कर्मी मीडिया का कैमरा चलते ही लोगों को इधर-उधर हटाने लगे। लोगों को मास्क लगाने के लिए टोकने लगे। जबकि लोग इसकी परवाह किये बगैर आगे बढ़ गए।
ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से लोगों का टीकाकरण का मैसेज जांचने के बारे में पूछा तो उन्होंने कार्रवाई करने की जानकारी न होने की बात कही। कहा कि हमें सिर्फ मास्क की जांच करनी है। अधिकारियों ने टीकाकरण मैसेज जांचने के लिए नहीं कहा है। फिर हम क्यों जांचेंगे। यदि मैसेज जांचना है, तो पुलिस साथ होनी चाहिए। ऐसे कोई मैसेज नहीं दिखा रहा। वहीं, एडवांस टिकट विंडो पर तैनात कर्मियों ने बताया कि हमें नहीं बताया है कि बुकिंग करने से पहले वैक्सीन का मैसेज देखना है। मैसेज देखने के लिए कई कर्मियों की ड्यूटी लगाई है। जांच के बाद ही लोगों को बस स्टैंड में प्रवेश करने दिया रहा है। वहीं, रेलवे स्टेशन पर जांच करने वाले ही नदारद रहे। यहां न मास्क जांचा गया न वैक्सीन की पुष्टि हुई।
ये कहना है बस और रेलवे यात्रियों का
मैं ऑटो से उतरकर सीधे बस में आकर बैठ गया। मुझसे तो किसी ने भी टीकाकरण के बारे में नहीं पूछा है।
रमेशचंद्र
किसी ने भी कोरोना का टीका लगवाने अथवा न लगवाने के बारे में पूछा नहीं है। जब कोई आएगा तब बात करेंगे।
गोदावरी
चरखीदादरी जा रहा हूं। बस स्टैंड पर किसी ने भी टीकाकरण के बारे में नहीं पूछा। वैसे मैं प्रिंट भी लेकर आया हूं।
सुभाष चंद्र
रेलवे स्टेशन पर सुबह से बैठा हूं। गोरखपुर जाना है। एक भी कर्मी टीकाकरण के बारे में पूछने तक नहीं आया है।
राम सरीख
अरे भाई, जब गेट पर चेकिंग करने वाला ही नदारद है, तो भला कौन पूछेगा टीकाकरण हुआ है या नहीं हुआ है।
रविंद्र शर्मा
देख सकते हैं कि रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के क्या इंतजाम है। ऐसे में कैसे कोरोना गाइड लाइन का पालन हो सकेगा।
जोगेंद्र
एक भी रेलवे का बंदा वैक्सीन के बारे में पूछने नहीं आया है। हां, हमारे मोबाइल में मैसेज के साथ-साथ प्रिंट आउट भी है।
हरीराम
वर्जन
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के टीकाकरण की जांच न होने के बारे में कुछ नहीं बता सकता हूं। जांच क्यों नहीं हो रही है, इसका जवाब तो डीआरएम के पीआरओ ही देंगे।
- बीएस मीणा, स्टेशन अधीक्षक
टीकाकरण का मैसेज देखने की पता चलने से स्टैंड पर कम यात्री आए हैं। कर्मियों की ड्यूटी लगाई है। टीकाकरण कैंप भी लगाया है। हरेक की जांच संभव तो नहीं है। रविवार से सख्ती करवा देंगे।
- दलबीर फौगाट, जीएम रोहतक डिपो