पंडित लख्मीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (पीएलसी सुपवा) में शुक्रवार को महाभारत के ‘धर्मराज’ युधिष्ठिर एवं अभिनेता गजेंद्र सिंह चौहान ने कुलपति का कार्यभार संभाला। उनका कैंपस पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। यहां उन्होंने अपने कार्यकाल में कुलपति की जिम्मेदारी संभालते हुए संस्थान को आगे ले जाने पर जोर देने का दावा किया। पहले दिन कुलपति ने विवि परिसर का दौरा कर डिजाइन विभाग के विद्यार्थियों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया व शानदार उत्पाद तैयार करने पर उन्हें सराहा।
देश के कोन-कोने में कला पहुंचाने का रहेगा प्रयास
पत्रकारों से बातचीत में नवनियुक्त कुलपति ने कहा कि मैं एक एक्टर हूं। एक्टिंग मेरा विभाग है। इसके अलावा सबके साथ मिलकर सभी विभागों को बेहतर बनाया जाएगा। संस्था को आगे ले जाना है। यह काम कैसे होगा, इसकी रणनीति बनाई जाएगी। हरियाणा में प्रतिभा है। लोगों में अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर व क्रिएटिविटी है। यह बड़ा विवि है। सुंदर व आकर्षक भवन है। इसे आगे ले जाया जाएगा। विवि के जरिये देश के कोने-कोने में कला को पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। मेरे पास फिल्म व फिल्म इंडस्ट्री एसोसिएशन का अनुभव है। इसका बेहतर प्रयोग किया जाएगा। सकारात्मक सोच का व्यक्ति हूं। इसी सोच के साथ काम किया जाएगा।
कलाकार चाहे कितना अच्छा हो, फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री कैसे मिले, वहां कैसे जाएं, कैसे काम करें, इस बारे में उसे जानकारी नहीं होती। मेरा प्रयास रहेगा कि विवि के विद्यार्थियों को इस बारे में अच्छे से जानकारी दी जाए। इससे वे भटकेंगे नहीं। सही रास्ते में अपनी ऊर्जा लगाकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकेंगे। यहां विद्यार्थियों के लिए निर्धारित सीटें हैं। टैलेंट इससे ज्यादा है। विवि की सीटों से वंचित टैलेंट को भी यहां लाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए छोटे-छोटे डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए जाएंगे। इधर-उधर बिखरे टैलेंट को यहां लाया जाएगा। उसे तराशा व निखारा जाएगा।
अब सुपवा में विद्यार्थी कर सकेंगे पीएचडी
सुपवा में अब विद्यार्थी स्नातक व स्नातकोत्तर डिग्री ही नहीं, पीएचडी भी कर सकेंगे। इसके लिए ऑर्डिनेंस पास हो गया है। कैंपस में जल्दी ही पीएचडी शुरू कराई जाएगी। इससे ज्यादा एक्सपर्ट मिलेंगे। यही नहीं, विद्यार्थियों के लिए गेस्ट लेक्चर विशेष तौर पर रखे जाएंगे। इसके लिए बड़े स्टार भी बुलाएं जाएंगे। विद्यार्थी उनके अनुभव से नया सीख सकेंगे। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. किरण कंबोज, परीक्षा नियंत्रक वेद नांदल, डॉ. बेनुल तोमर समेत अन्य शिक्षक व गैर शिक्षक मौजूद रहे।
39 साल पहले छोड़ दी थी दिल्ली, पहले की नौकरी
कुलपति ने कहा कि मेरा हरियाणा से पुराना व विशेष लगाव है। करनाल के मधुबन में वर्ष 1985 में हरियाणवी फिल्म शोना की थी। गोगा पीर के मंदिर के पास शूटिंग की थी। मेरे पूर्वज सोनीपत के राठधना गांव से हैं। बाद में वे दिल्ली एक गांव में जा बसे। वहां से हिम्मत कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए मुंबई चला गया। रेडियोलॉजी से कोर्स के बाद फिल्म जगत में अपनी पहचान बनाने के लिए 39 साल पहले गांव छोड़ा था। मुंबई में रहकर रेडियोलॉजी कोर्स के बूते नौकरी की। इससे अपना खर्च चलाया और फिल्म जगत में लगातार प्रयास जारी रखे। इस दौरान अनेक फिल्मों व सीरियल में काम किया। महाभारत ने मुझे पहचान दी। हरि की इस पावन भूमि पर अब फिर आने का सौभाग्य मिला है। यह मेरे लिए गौरवपूर्ण है।