गोरखपुर परमाणु बिजली संयंत्र
क्षमता : 700-700 मेगावाट की चार इकाइयां
लागत : 23502 करोड़ रुपये
भूमि अधिग्रहण : 1504 एकड़
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह सोमवार को गोरखपुर में हरियाणा के पहले परमाणु संयंत्र का शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही गोरखपुर भी पूरी दुनिया के नक्शे पर आ जाएगा। प्रधानमंत्री के स्वागत की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सोमवार को सांसद अशोक तंवर और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह ने तैयारियों का जायजा लिया। कार्यक्रम स्थल को पूरी तरह पुलिस और कमांडो फोर्स ने अपने घेरे में ले लिया है। इस परमाणु संयंत्र में 2800 मेगावाट बिजली का चार यूनिट से उत्पादन किया जाएगा। संयंत्र पर 23502 करोड़ रुपये की लागत आएगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि पांच साल के भीतर यहां पहली यूनिट से उत्पादन शुरू हो जाएगा। परमाणु संयंत्र के लिए गांव गोरखपुर, काजलहेड़ी और बड़ोपल की 1504 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है, जिसमें अकेले गोरखपुर की 1313 एकड़ जमीन है। परमाणु संयंत्र के लिए 320 क्यूसिक पानी की जरूरत पड़ेगी और 160 क्यूसिक पानी वापस छोड़ दिया जाएगा। प्लांट के चारों ओर एक किलोमीटर की परिधि में सघन वन विकसित किए जाएंगे ताकि पर्यावरण शुद्ध रह सके।
पैंतीस मिनट रुकेंगे पीएम
प्रधानमंत्री 13 जनवरी को फतेहाबाद के गांव गोरखपुर में मात्र 35 मिनट का ही समय दे पाएंगे। दिल्ली एयरपोर्ट से दोपहर दो बजे यहां के लिए चलेंगे। उनका विमान सिरसा के एयरफोर्स के एयरपोर्ट पर 2.50 पर पहुंचेगा। प्रधानमंत्री 2.55 मिनट पर हेलीकॉप्टर से फतेहाबाद के लिए रवाना होंगे। हेलीकॉप्टर 3 बजकर 25 मिनट पर गोरखपुर में एनपीसीआईएल की जमीन पर बनाए गए हेलीपेड पर उतरेगा। यहीं से प्रधानमंत्री सड़क द्वारा 3 बजकर 30 मिनट पर शिलान्यास स्थल पर पहुंचेंगे। गोरखपुर परमाणु संयंत्र की आधारशिला रखने के बाद प्रधानमंत्री उसके साथ लगी प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे व जनसभा को भी संबोधित करेंगे। चार बजकर 5 मिनट पर प्रधानमंत्री गोरखपुर से उड़ान भरकर सिरसा पहुंचेंगे। वहां से वह कुछ देर बाद दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
विरोधी काले झंडे दिखाने को तैयार
परमाणु संयंत्र के विरोध में भी आवाज बुलंद हो रही है। परमाणु विरोधी मोर्चा इसके खिलाफ हररोज प्रदर्शन कर रहा है। वहीं, इनेलो ने पीएम को काले झंडे दिखाने का ऐलान किया है। इनका कहना है कि परमाणु संयंत्र के लिए उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किया गया है। संयंत्र के लगने से यहां पानी और पर्यावरण दूषित होगा। संयंत्र से यहां रहने वाले वन्य प्राणियों पर संकट मंडराएगा।
इतनी मिलेगी बिजली
- 50 प्रतिशत बिजली राज्य और 50 प्रतिशत केंद्रीय पूल में जाएगी
- 15 प्रतिशत बिजली विशेष मांग पर राज्य को दी जा सकती है
- 1.5 करोड़ रुपये की लागत से आठ करोड़ रुपये की बिजली तैयार होगी
- 1274 लाख यूनिट प्रतिदिन है हरियाणा में बिजली की उपलब्धता