कृषि विभाग ने इस बार जिले में गेहूं का रकबा एक लाख पांच हजार हेक्टेयर रखा हुआ है, जिसमें से 90,000 हेक्टेयर में बिजाई हो चुकी है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले 10 दिन के अंदर बिजाई का काम पूरा हो जाएगा।
इस बार धान की खेती करने वाले 95% से ज्यादा किसानों ने धान की पराली को बिना आग लगाए गेहूं की सीधी बजाई की है, जो भी गत वर्ष यह आंकड़ा कम था। इतना ही नहीं, किसानों ने जीरो टिलेज, सेट, ड्रिल मशीन व सुपर सीड से गेहूं की बिजाई कर धन व समय की बचत के साथ पानी की भी बचत की है।
एसडीओ डॉ. संदीप ने बताया कि इस विधि द्वारा बोए गए गेहूं की नली मोटी और पत्ती चौड़ी निकल रही है। इससे उम्मीद है कि गेहूं उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत अधिक तक बढ़ोतरी होगी। कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है।
अनुदान अधिकारी ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा इस तकनीक को खूब अपनाया गया। यह तकनीक पैदावार में लाभदायक भी होगी। प्रदेश सरकार भी किसानों के लिए नए-नए तकनीकी कृषि यंत्र पर अनुदान दे रही है। गेहूं बिजाई के जीरो टिलेज सीड ड्रिल व सुपर सीडर जैसी मशीनों पर प्रदेश सरकार द्वारा अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा नई विधि अपनाने से धन समय और पानी की भी बचत होती है और अच्छी पैदावार की उम्मीद है।