फ्लैग : काठमंठी के प्रॉपर्टी टैक्स फार्मूले को पूरे शहर में लागू करने का मामला, तीन सदस्यीय कमेटी ने दी रिपोर्ट
हैडिंग : एक शहर में दो प्रॉपर्टी टैक्स नियम नहीं कारगर
-दूसरे बाजरों से भी उठ रही 35 वर्ग गज का फार्मूला लागू करने की मांग
सरकार से मांगा जाए मार्गदर्शन
: सुखपुरा चौक, अनाज मंडी, घनीपुरा व सब्जी मंडी के व्यापारी भी आ रहे सामने
: मार्बल व्यापारी बोले, घनीपुरा काठमंडी का हिस्सा, हाउस में करवाया जाए उनका प्रस्ताव पास
: पालिका बाजार के प्रधान बोले, सहकारिता मंत्री के सामने रखेंगे टैक्स का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पांच साल पहले प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर काठमंडी के व्यापारियों के लिए लागू 35 वर्ग गज का फार्मूला नगर निगम का सिरदर्द बन गया है। निगम आयुक्त आरएस वर्मा द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने आयुक्त को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में साफ किया है कि यह फार्मूला दूसरे बाजारों में लागू करना निगम के अधिकारियों के लिए संभव नहीं है। मामले में प्रदेश सरकार से मार्गदर्शन लिया जाए। इसके लिए ब्योरा तैयार किया जा रहा है कि काठमंडी के 174 व्यापारियों में से कितने व्यापारियों ने टैक्स जमा कराया है। कितना जमा कराया है। पूरे शहर में काठमंडी की तर्ज पर कितने दुकानें हैं, जहां दुकान की लंबाई ज्यादा व चौड़ाई कम है। पूरा ब्योरा बनाकर निगम प्रशासन सरकार के पास भेजेगा।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 2014 में लाइनपार काठमंडी में व्यापारियों ने जिला प्रशासन से मांग की थी कि उनकी फर्नीचर की दुकानें हैं, जिनकी लंबाई ज्यादा व चौड़ाई कम है। इतना ही नहीं, दुकानों में गोदाम का हिस्सा 80 से 85 प्रतिशत है। ऐसे में उनका कामर्शियल दर पर पूरे एरिया का टैक्स तय न किया जाए। तत्कालीन नगर निगम हाउस ने प्रस्ताव पास करके एक फार्मूला तैयार किया। इसके तहत 170 दुकानों के आगे के 20 वर्ग गज तक के एरिया का टैक्स कामर्शियल दर तो बाकी पिछले एरिया का टैक्स गोदाम की दर से तय किया गया। इसी बीच प्रदेश में सरकार बदल गई। 2015-16 का जो टैक्स आया, वह कामर्शियल दर पर आया। इसके बाद व्यापारी सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर से मिले। मंत्री ने निगम प्रशासन के बाद मामला भेजा। चंडीगढ़ से हरी झंडी मिलने के बाद पिछले तीन वित्त वर्ष से निगम आगे के 35 वर्ग गज तक के हिस्से का कामर्शियल दर और बाकी हिस्से का गोदाम दर से टैक्स वसूल रहा है। अब घनीपुरा के व्यापारी मांग कर रहे हैं कि उनकी दुकानें भी उसी साइज की हैं, जिनकी लंबाई ज्यादा व सड़क के साथ लगती चौड़ाई कम है। ऐसे में उनको भी काठमंडी की तर्ज पर प्रॉपर्टी टैक्स में छूट दी जाए। काठमंडी के व्यापारियों को मिली छूट की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी, जिसमें ज्वाइंट कमिश्नर राकेश कुमार, ईओ अभय सिंह और जोनल टैक्स आफिस जगदीश चंद्र को शामिल किया गया था। जांच टीम ने पूरी जांच पड़ताल पूरी कर ली है। बुधवार को अपनी रिपोर्ट टीम ने आयुक्त को सौंप दी।
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अनाज मंडी व सुखपुरा चौक के व्यापारियों ने भी मांगी छूट
निगम के एक अधिकारी ने बताया कि काठमंडी की तर्ज पर घनीपुरा के व्यापारी तो पहले ही प्रॉपर्टी टैक्स में छूट मांग रहे थे। अब अनाज मंडी व सुखपुरा चौक के व्यापारियों ने भी यह मांग करनी शुरू कर दी है। इसके लिए लिखित में पत्र दिए गए हैं।
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जैसे ही रिपोर्ट मिलेगी, मामले में फैसला लिया जाएगा। क्योंकि शहर के दूसरे व्यापारी भी इस तरह की छूट की मांग कर रहे हैं। आखिरी फैसला निगम एक्ट के तहत लिया जाएगा।
-आरएस वर्मा, आयुक्त नगर निगम
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चंडीगढ़ से हरी झंडी मिलने के बाद निगम तीन साल से दिल्ली-रोहतक रेलवे लाइन से लेकर काठमंडी के दूसरे सिरे तक दुकान के आगे के हिस्से के 35 वर्ग गज तक के एरिया का कामर्शियल और पिछले हिस्से का गोदाम दर से टैक्स ले रहा है। अगर इस फार्मूले को खत्म किया गया तो वे दोबारा मंत्री से मिलेेंगे।
-पिंकी यादव, व्यापारी नेता काठमंडी
कामर्शियल व गोदाम के प्रॉपर्टी टैक्स दर में भारी अंतर
नियमों के तहत निगम कामर्शियल एरिया में प्रॉपर्टी टैक्स की दर 18 रुपये से लेकर 45 रुपये प्रति वर्ग तक तक लगाता है, जबकि गोदाम टैक्स की दर मात्र साढ़े 4 रुपये से लेकर ज्यादा से ज्यादा 7 रुपये 20 पैसे प्रति वर्ग गज है। इस कारण व्यापारी गोदाम की दर से टैक्स की दर तय करने की मांग कर रहे हैं।
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मेयर मनमोहन गोयल भी मान चुके हैं कि उनकी दुकानें काठमंडी का हिस्सा हैं। जब काठमंडी के लाइन पार व्यापारियों का प्रॉपर्टी टैक्स विशेष फार्मूले के तहत तैयार होता है तो उनका क्या कसूर है। मेयर से मांग करेंगे कि जल्द हाउस में प्रस्ताव पास करके निगम प्रशासन पर उनको राहत देने के लिए दबाव बनाए।
-राजू भुटानी, प्रधान मार्बल एवं टाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन घनीपुरा
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नगर निगम एक्ट के अंदर प्रावधान है कि जहां दुकानदार सामान बेचता है वह एरिया कामर्शियल और जहां सीलबंद सामान रखा है, वह एरिया गोदाम है। उसी आधार पर सर्वे करके निगम व्यापारियों के बिल बनाए। ऐसा न करके निगम एक्ट का उल्लंघन कर रहा है।
-गुलशन ईशपुनियानी, महासचिव रोहतक व्यापार मंडल