फोटो परिचय : काहनौर गांव में बेटियों को जन्म देने वाले परिजनों को सम्मानित करते सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण अग्रवाल।
बेटियों की शिक्षा को लेकर सौतेला व्यवहार होते देखा तो निशुल्क पढ़ाने का उठाया बीड़ा
जिस घर में बेटी ने लिया जन्म उसके परिजनों को समानित कर रहे काहनौर के रिटायर्ड शिक्षक कृष्ण अग्रवाल
-प्रत्येक तीन माह में विभिन्न गांव में बेटियों के परिजनों को करते हैं सम्मानित
महबूब अली
रोहतक। काहनौर के रिटायर्ड शिक्षक ने बेटियों की शिक्षा को लेकर लोगों में सौतेला व्यवहार होता देखा तो गरीब परिवारों की बेटियों को निशुल्क पढ़ाने की मुहिम शुरू कर दी। यही नहीं विभिन्न गांव में जाकर उन परिजनों को सम्मानित कर रहे हैं, जिनके घर में पिछले छह माह में बेटियों ने जन्म लिया है। रिटायर्ड शिक्षक की इस पहल की हर कोई सराहना कर रहा है।
काहनौर निवासी कृष्ण कुमार (89) अग्रवाल दिल्ली के महावीर जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल से बतौर शिक्षक रिटायर्ड हुए थे। कृष्ण अग्रवाल ने बताया कि अब से करीब 20 साल पूर्व वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे, देखने में आया कि परिजन बेटियों को पढ़ने के लिए नहीं भेजते थे। रिटायर्ड शिक्षक ने जांच की तो पता लगा कि माता-पिता बेटियों को इसलिए यह कहकर पढ़ने के लिए नहीं भेजते कि उसे आगे पढ़कर क्या करना है। बेटा पढ़ेगा तो बड़ा अफसर बन कर नाम रोशन करेगा। बेटियों के प्रति यही सौतेला व्यवहार रिटायर्ड शिक्षक के मन में घर कर गया। कृष्ण अग्रवाल ने बेटियों को निशुल्क घर-घर जाकर पढ़ाने की मुहिम शुरू कर दी। वह कलानौर के अलावा दिल्ली में भी घर-घर जाकर बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं। पिछले पांच साल से कलानौर के अलावा काहनौर, तिमारपुर गांव में जिन घरों में छह माह के अंदर बेटियों ने जन्म लिया है, उनके माता-पिता को भी सम्मानित कर चुके हैं। यही नहीं बेटियों को अधिक से अधिक पढ़ाने की अपील भी करते हैं। अब 8 मार्च को भी काहनौर में बेटियों को सम्मानित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
बेटियों को आगे बढ़ाना ही उद्देश्य
कृष्ण का कहना है कि बेटियों को पढ़ाने और उन्हें जन्म देने वाले अभिभावकों को सम्मानित करने पर उन्हें जो ख़ुशी मिलती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। उनका उद्देश्य बेटियों को आगे बढ़ाना है।
भतीजा दीपक भी करता है सहयोग
कृष्ण ने बताया कि उनका भतीजा दीपक अग्रवाल भी कार्यक्रम में भरपूर सहयोग करता है। कोशिश करेंगे कि अन्य गांव में भी इसी तरह से सम्मान समारोह आयोजित किये जा सकें।