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पेंटिंग में यश और हास्य कविता में गौरव प्रथम

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पेंटिंग में यश और हास्य कविता में गौरव प्रथम
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चरखी दादरी।
चारित्रिक उत्थान सामाजिक उन्नति की पहली सीढ़ी है। अगर बचपन से ही नैतिक व अध्यात्म की शिक्षा दी जाएं तो हमारा जीवन आदर्श बन सकता है। इससे हम एक सबल व संपन्न राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। ये विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय चरित्र निर्माण, बाल व्यक्तित्व विकास शिविर के समापन अवसर पर सेवा केंद्र प्रभारी वसुधा ने व्यक्त किए। इस दौरान बच्चों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताएं भी करवाई गई। इस दौरान आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में यश प्रथम और स्नेहा द्वितीय रही। हास्य कविता में प्रथम व द्वितीय गौरव व प्रिंस रहे। ब्रह्माकुमारी वसुधा ने कहा कि सादगी, सफाई तथा सच्चाई आदि मूल्यों को बच्चों के जीवन में धारण करवाएं, जो उनके श्रेष्ठ चरित्र निर्माण में सहायक बन सकते हैं। उन्होंने कभी झूठ न बोलने, ईमानदारी से कार्य करने व माता पिता व गुरूजनों का सदैव आदर करने की दृढ़ प्रतिज्ञा भी बच्चों को करवाई। सभी विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
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मुख्य अतिथि पार्षद सुनीता गोयल ने कहा कि शिविर में बच्चों को श्रेष्ठ संस्कारशील बनने की जो कला सिखाई गई है यह समाज की नींव मजबूत बनाने में सहायक होगी। इस दौरान कविता में साक्षी व गीत में अनुज अव्वल रहे। समूह नृत्य में शबनम, रोजी व भाषण में दीपक ने प्रथम स्थान हासिल किया। म्यूजिकल चेयर में मोनू व हरीश पहले दोनों स्थानों पर रहे। फैंसी ड्रेस में केशव व गौरव प्रथम, सोनू द्वितीय तथा दीपिका ने तीसरा स्थान पाया। बाढ़डा पंचायत समिति उपाध्यक्ष अनीता ने कहा कि बचपन से ही अध्यात्म को अपना रचनात्मक कार्य करे तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। प्रवक्ता करूणा मिश्रा ने कहा कि उच्च चरित्र से श्रेष्ठ गांव व समाज का निर्माण संभव है। शिविर संयोजक ब्रह्माकुमारी ज्योति व पूजा ने कहा कि इस कैंप के दौरान बच्चों को नैतिक व मानवीय मूल्यों की शिक्षा के साथ साथ लेखन, गायन, भाषण, पेटिंग, हास्य कविता आदि कलाओं को विकसित करने पर भी बल दिया गया।
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