बच्चों के सृजनात्मक विकास में अहम भूमिका निभा रहीं ‘एम्पावर्ड वुमन’
- डॉ. अरुणा आंचल और अलका मदान बनीं महिला सशक्तिकरण की आवाज
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
एम्पावर्ड वुमन के अवॉर्ड से नवाजी गईं डॉ. अरुणा आंचल और बच्चों के सृजनात्मक विकास तथा शिक्षा की दिशा में डॉ. अरुणा आंचल और अलका मदान अहम भूमिका निभा रही हैं। सिर्फ रोहतक में ही नहीं, बल्कि हरियाणा के हर जिले तक पहुंचकर दोनों शिक्षा की अलख जगा रही हैं। करीब दो दशक के दौरान किए गए अपने सामाजिक कार्यों के लिए इन्हें विभिन्न मंचों पर कई बार सम्मानित किया गया। हरियाणा में महिला सशक्तीकरण का जीवंत उदाहरण है।
कई भूमिकाओं का निचोड़ है नारी : डॉ. आंचल
रोहतक की रहने वाली डॉ. अरुणा आंचल ने कहा कि जीवन में कई भूमिकाओं का निचोड़ नारी है। नारी का सम्मान जरूरी है। वह मां, बहन, पत्नी कई भूमिकाओं साथ ही आज की नारी भी है। आज के समाज में नारियों का आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है, जिसके लिए शिक्षित होना जरूरी है। झज्जर स्थित रवींद्र भारती कालेज ऑफ एजूकेशन की प्रिंसिपल हैं और उनके सामाजिक कार्यों की कर्मभूमि रोहतक है। वह बीते 20 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रही हैं। उनका कहना है कि नारी सशक्तीकरण में बालिकाओं की कल्पना को पंख देना बेहद जरूरी है। अब तक वह सैकड़ों वर्कशॉप कर चुकी हैं। इसके साथ ही युवतियों की काउंसिलंग भी करती हैं। उन्हें समझाती हैं कि किस तरह समाज में वह अपना अलग स्थान बना सकती हैं। प्री-मेरिटल काउंसिलिंग भी करती हैं। वह कबीर अनुभूति सेवा समिति की महिला सेल की डायरेक्टर और गंगा सेवा समिति की सदस्य भी हैं। उन्हें यूथ पार्लियामेंट में मिनिस्टरी ऑफ पार्लियामेंट द्वारा बेस्ट मोटिवेशनल स्पीकर, हरियाणा कला परिषद द्वारा मातृ शक्ति अवॉर्ड, सरदार वल्लभ भाई पटेल साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑर्गेनाइजेशन की ओर से वुमन एम्पावर्ड, इंडिया प्राइड, प्रतिमा रक्षा समिति की ओर से एजुकेशन एक्सीलेंस का अवॉर्ड मिल चुका है।
महिलाएं अपनी शक्तियों को पहचानें : अलका मदान
रोहतक के राकवमा विद्यालय मदीना में कार्यरत कॉमर्स की प्रवक्ता अलका मदान ने कहा कि महिलाओं में धैर्य, ऊर्जा और दृढ़ता पुरुषों की अपेक्षा कहीं अधिक है। आवश्यकता है तो केवल आत्मविश्वास की। अपनी शक्तियों को पहचानें तो महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी हो सकती हैं। 20 वर्षों से शिक्षण कार्य से जुड़ी अलका मदान ने विभाग के विभिन्न जिलास्तरीय और राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में अपना योगदान दिया। शिक्षा निदेशालय हरियाणा द्वारा चलाए गए क्विज क्लब प्रोजेक्ट में की रिसोर्स पर्सन की अहम भूमिका निभाई। हिंदुस्तान स्काउट एवं गाइड से जुड़ी अलका मदान ने सामाजिक परियोजनाओं में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। कन्या चरित्र निर्माण तथा महिला सशक्तीकरण के विभिन्न शिविरों में भी भाग लिया। सार्वदेशिक आर्य युवक परिषद द्वारा हरियाणा शिक्षक गौरव सम्मान, प्रतिमा सम्मान समिति द्वारा एम्पावर्ड वुमन अवॉर्ड, राष्ट्रीय रत्न अवॉर्ड, कॉमर्स टीचर फेडरेशन द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ एप्रीसिएशन, यंग इंडियन एसोसिएशन और लक्ष्य फाउंडेशन की ओर से ‘द लीजेंड ऑफ सुभाष चंद्र बोस’ अवॉर्ड प्राप्त कर चुकीं हैं। ब्रिटिश काउंसिल की कोर स्किल्स वर्कशॉप में भी इन्होंने अपने ब्लॉक तथा जिले का प्रतिनिधित्व किया।
महिला शक्ति बोली : समान अधिकारी जरूरी
समाज में संतुलन जरूरी है। समाज में अगर एक स्टेज है तो उसमें महिला और पुरुष दोनों ही पात्र जरूरी हैं। महिला सशक्तीकरण की दिशा में लोग बढ़ रहे हैं, जागरूकता भी आई। इसे और आगे ले जाने की जरूरत है, जहां फर्क मिट जाए।
- ममता मलिक, प्रिंसिपल, जॉन वैस्ले स्कूल
इस समाज में सबसे ज्यादा उम्मीदें महिलाओं से ही होती हैं, वह हर भूमिका निभाती है, लेकिन उसे खुद की शक्ति पहचानने की जरूरत है। बुजुर्गों को चाहिए कि वह आने वाली पीढ़ी की महिलाओं को एक बेहतर समाज देकर जाएं, जहां महिलाओें को उनका हक मिले।
- ललिता मलिक, को-आर्डिनेटर, एमडीएम स्कूल
महिलाओं को कभी हार नहीं माननी चाहिए। जीवन में कितनी भी विपरीत परिस्थितियां क्यों न हों, उसका सामना करना जरूरी है, ऐसा तभी होगा, जब महिला शिक्षित हो। जीवन एक संघर्ष है, जिससे पार पाना महिलाओं का आता है। बस अपनी शक्ति पहचानने की जरूरत है।
- डॉ. संगीता तोमर, डायरेक्टर साइनिंग स्कॉलर्स
महिला हर भूमिका को बखूबी निभाती है, चाहे वह एक गृहिणी हो या कोई नौकरीपेशा। ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि दोनों में कोई कमतर है। कोई महिला नौकरी करे तो वह कमतर नहीं हो जाती, वह आगे बढ़कर घर और बाहर दोनों की जिम्मेदारी संभालती हैं।
- जेनिफर, नौकरीपेशा