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जिले में 6 ऑक्सीजन प्लांट, 100 से ज्यादा वेंटिलेंटर सुविधा

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जिला अस्पताल में लगे बैड । संवाद
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रोहतक। पहली व दूसरी लहर में जानमाल का नुकसान करने वाली कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की भी पोल खोल कर रख दी। दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन किल्लत व वेंटिलेटरों के लिए जूझ रही आबादी को मोटी रकम खर्च करने पर भी प्राणवायु नहीं मिल रही थी। लोग एक-एक सांस के लिए संघर्ष कर रहे थे। वहीं टीकाकरण अभियान के बाद लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से आए बदलाव ने राहत पहुंचाई। उधर, तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए आक्सीजन किल्लत, वेंटिलेटरों की कमी व दवाओं की अनुपलब्धता से बचने के लिए पहले ही तैयारी कर ली गई। नतीजतन अब हम कोरोना महामारी या ऐसी परिस्थितियों से निपटने में सक्षम हो गए हैं।
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महामारी की तीसरी लहर के अंदेशे को खतरनाक बताते हुए स्वास्थ्य विभाग व सरकार ने एहतियातन कदम उठाए। इसके तहत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। पीजीआई में कोविड मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड की क्षमता 500 से बढ़ाकर एक हजार की गई। ट्रॉमा सेंटर में वेंटिलेटरों की सुविधा को बेहतर किया गया। पीजीआई में ही अब करीब 100 से ज्यादा वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। जबकि पहले यह संख्या करीब 15 थी। इनमें से 8 आईसीयू में थे। अब आईसीयू को ही बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा बच्चों के लिए भी अलग आईसीयू की व्यवस्था की गई है। पीजीआई के अलावा सिविल अस्पताल में भी कोविड व गंभीर मरीजों के लिए यहां 100 बेड में से लगभग प्रत्येक पर ऑक्सीजन सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पीजीआई के समकक्ष आईसीयू तैयार किया गया है। यहां करीब 35 मरीजों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था की गई है। इससे पहले सिविल अस्पताल आईसीयू नाम मात्र का था। बेड भी सामान्य थे। सभी बेड पर आक्सीजन सुविधा नहीं थी। पीजीआई की व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। यहां 920 से ज्यादा बेड, 202 आईसीयू बेड, 206 आक्सीजन कन्संट्रेटर की सुविधा की व्यवस्था की गई है।
आक्सीजन की नहीं रहेगी किल्लत
कोरोना ने जिले को भविष्य के लिए आक्सीजन की बेहतर सुविधा मुहैया करा दी है। व्यवस्था दुरुस्त रही तो आक्सीजन किल्लत नहीं रहेगी। मरीजों को भी भटकना नहीं होगा। इसके लिए जिले में छह आक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। इनमें से तीन प्लांट पीजीआई व तीन जिला स्वास्थ्य विभाग के तहत सिविल अस्पताल परिसरों में लगाए गए हैं। इनमें से एक प्लांट रोहतक व दो महम व कलानौर में लगाए गए हैं।
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वर्जन:
कोरोना नियंत्रण में है। महामारी का खतरा टल चुका है। एहतियात बरतना अभी जरूरी है। इसी कड़ी में टीकाकरण अभियान जारी है। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं पहले से बेहतर बनी हैं। ऑक्सीजन के छह प्लांट लग गए हैं। इनसे ऑक्सीजन किल्लत नहीं रहेगी। बड़ी संख्या में मरीज आए तो भी उन्हें अस्पतालों में भर्ती करने की व्यवस्था रहेगी। पीजीआई में एक हजार बेड के अलावा सिविल अस्पताल में सौ बेड व अन्य खंड स्तरीय अस्पतालों में व्यवस्था बनाई गई है। आईसीयू व वेंटिलेटरों की भी पर्याप्त संख्या उपलब्ध है।
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- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन।

जिला अस्पताल में बना ऑक्सीजन प्लांट। संवाद

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