रोहतक/सांपला। जिले में शनिवार को हुई ओलावृष्टि से 75 हजार हेक्टेयर में गेहूं व सरसों की फसल में 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। इसमें ज्यादातर क्षेत्र रोहतक व सांपला खंड का है। कलानौर खंड के भी तीन-चार गांव प्राकृतिक आपदा की चपेट में आए हैं। सोमवार को सात गांवों के किसान लघु सचिवालय पहुंचे और पोर्टल पर पंजीकरण की शर्त हटाकर विशेष गिरदावरी (सर्वे) कराने की मांग की।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में एक लाख 4 हजार हेक्टेयर में गेहूं, 16 हेक्टेयर में सरसों, 4 हजार हेक्टेयर में सब्जी और 1 हजार हेक्टेयर में जौ की फसलों की बिजाई हुई है। 2 लाख 56 हजार 989 एकड़ का मेरी फसल-मेरा ब्योरा पर पंजीकरण कराया गया है। शनिवार को ओलावृष्टि से रोहतक व सांपला खंड में 50 से लेकर 100 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। इसमें गांव हुमायूंपुर, कंसाला, पाेलंगी, पाकस्का, बलियाना, खेड़ी साध, बलियाना, मायना, पहरावर, करौंथा, गरनावठी, सुंडाना सहित अन्य आसपास के गांव शामिल हैं। पहरावर व मायना और पाकस्मा में सबसे ज्यादा ओलावृष्टि हुई है। तीन दिन बाद भी खेतों में ओले पड़े हैं, जो पिघल नहीं रहे हैं।
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एडीसी बोली, 2723 एकड़ का हुआ ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) वैशाली सिंह ने बताया कि ओलावृष्टि के बाद जिले में अभी तक 2723.26 एकड़ कृषि भूमि के लिए 774 किसानों ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा दिया है। शेष किसान भी पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाएं। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल 15 मार्च तक खुला रहेगा। किसान कॉमन सर्विस सेंटर पर या पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। जो किसान कॉमन सर्विस सेंटर पर नहीं जा सकते वह तहसील स्तर पर स्थापित किए गए हेल्प डेस्क की सहायता ले सकते हैं।
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यह चाहिए पोर्टल पर पंजीकरण के लिए
प्रशासन के मुताबिक जिन किसानों ने फसल का बीमा करवा रखा है, उनके रजिस्ट्रेशन के लिए मोबाइल नंबर, आधार कार्ड व बीमा पॉलिसी नंबर का होना जरूरी है। किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत टोल फ्री नंबर 14447 पर भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं जबकि दूसरे किसान पहले अपना मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाएं। इसके बाद ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण होगा। किसान को स्वयं नुकसान का आकलन करके जमीन के ब्योरे के अलावा फसल का फोटो अपलोड करना होगा।
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पोर्टल के झंझट में न उलझाए सरकार, पिछला मुआवजा अब तक नहीं मिला
किसान सभा महासचिव सुमित दलाल ने बताया कि सरकार पोर्टल का झंझट खत्म करके स्पेशल सर्वे करवाया जाए। पोर्टल की वजह से ही किसानों का खरीफ व रबी 2023 का ओलावृष्टि और बारिश का मुआवजा आज तक किसानों को नहीं मिला है। इतना ही नहीं, सरकार 100 प्रतिशत नुकसान होने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये मुआजवा देती है, जिससे लागत भी नहीं निकल पाती। जगबीर सिंह मलिक ने सरकार से मांग की कि किसानों को 50 हजार प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।
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ये गांव के किसान पहुंचे लघु सचिवालय
सोमवार को बखेता, खेड़ी साध, रुड़की, मुंगाण , कंसाला, खरावड़, नौनंद, अटायल, पोलंगी, पाकस्मा, गढ़ी बोहर, बलम, बनियानी, गरनावठी , माड़ौदी, भालौठ, गुढान, कन्हेली,पहरावर, बलियाना, कसरेंटी व कटेसरा के किसान लघु सचिवालय पहुंचे।इस दौरान किसान सभा जिला प्रधान प्रीत सिंह, मायना सरपंच प्रवीण, सितेंद्र सरपंच आसान, चुलियाना, सरपंच सुंदर, कंसाला सरपंच राजू, हुमायूंपुर सरपंच अमित, रुड़की सरपंच वीरेंद्र, अशोक राठी, कृष्ण, नवीन , ढीलू, राजेश, सुभाष, राजेंद्र, सुखबीर, जगबीर, धर्मवीर, जोगेंद्र, सतबीर प्रधान, कर्मबीर, ईश्वर, इंद्रजीत, मनोज, अमित, अशोक दांगी, नरेंद्र, फकीर, बलवान सिंह और राय सिंह भी मौजूद रहे।