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नौवें चलो थियेटर महोत्सव की शुरुआत, हिमाचल के राज्यपाल ने दिए पुरस्कार

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समाज का चिंतक है रंगकर्मी, जो सामाजिक सुधार का काम करता है: आचार्य देवव्रत आर्य
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- राष्ट्रीय नाट्य उत्सव नौवें चलो थियेटर का हिमाचल के राज्यपाल ने किया शुभारंभ
- रंग कर्मियों को रंग सम्मान से नवाजा, राधा कृष्णन सभागार में सात दिन चलेगा नाट्य उत्सव
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के राधा कृष्णन सभागार में रास कला मंच सफीदों की ओर से सात दिवसीय नौवें चलो थियेटर, राष्ट्रीय नाट्य उत्सव की शुरुआत हुई। नाट्य उत्सव का शुभारंभ हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत आर्या ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि रंगकर्मी समाज का चिंतक है। वह समाज के उत्थान के प्रति चिंतित रहता है। बुराइयों को नाटक के माध्यम से उजागर कर समाज के उत्थान का काम रंगकर्मी करता है। देश के प्रसिद्ध रंगकर्मियों और लेखकों को रंग सम्मान से नवाजा गया।
नाट्य उत्सव की शुरुआत अमृतसर से आए नाट्य दल मंच रंगमंच की ओर से संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त केवल धारीवाल निर्देशित नाटक बुल्ले शाह से की गई। इस नाटक की भूमिका आचार्य देवव्रत ने दर्शकों के सामने रखी। उन्होंने कहा कि महान सूफी बुल्ले शाह ने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी। कट्टरवाद पर कुठाराघात कर समाज को सुधार के मार्ग पर प्रशस्त किया। वर्तमान में आतंकवाद का रूप ले चुके कट्टरपंथ के लिए बुल्ले शाह एक कड़ा संदेश हैं।
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राज्यपाल को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने नौवें चलो थियेटर नाट्य महोत्सव के ब्रोशर और रंग लेखक संजीव चौधरी की पुस्तक समाधि सर्प का विमोचन किया। रंग पुरस्कार प्राप्त सभी रंगकर्मियों और लेखकों को राज्यपाल ने शॉल, स्मृति चिह्न और नकद पुरस्कार प्रदान किया। नाट्य उत्सव का आयोजन संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, कला एवं संस्कृति विभाग हरियाणा सरकार, हरियाणा कला परिषद और उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के सहयोग से किया गया। रास कलामंच सफीदों के संस्थापक राज बिहारी, अध्यक्ष रवि मोहन, एमडीयू में छात्र कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. जगबीर राठी, डीन एकेडमिक अफेयर एके राजन, कुलपति बिजेंद्र कुमार, हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष सुदेश शर्मा मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन कुमार आकाश ने किया।

- 2017-18 के लिए इन्हें रंग सम्मान से नवाजा गया
1. हबीबी तनवीर रंग सम्मान - केवल धारीवाल- पंजाब में रंगकर्म को ऊंचाईयां दीं। कार्यशालाओं के जरिए युवा रंगकर्मियों को शिक्षित करने का योगदान
2. सूर्य कवि पं. लक्ष्मी चंद रंग सम्मान - सुदेश शर्मा- चंडीगढ़ से हैं और हरियाणा की संस्कृति व रंगमंच को बढ़ावा देने में अहम योगदान दिया
3. स्वदेश दीपक रंग लेखन सम्मान - डॉ. संजीव चौधरी- रंग लेखक में मूल्यवान योगदान के लिए सम्मान मिला
4. निर्मल पांडे रंग सम्मान - नाट्य निर्देशन, अभिनय और स्कूल के बच्चों को रंगमंच के लिए प्रेरित करने का योगदान
5. पृथ्वी राज कपूर रंग सम्मान - प्रीतपाल पन्नू करनाल से हैं और भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच देने का योगदान
6. पं. सत्यदेव दुबे रंग सम्मान - जयदेव तनेजा दिल्ली से हैं। रंग लेखन और रंग समीक्षक के तौर पर योगदान
7. राम मेहर मलिक रंग सम्मान - रविंदर शर्मा, चंदीगढ़ से हैं और प्रसिद्ध चित्रकार हैं, ललित कला को बढ़ावा देने में अहम योगदान

- रोहिताश गौड़ और हिमानी शिवपुरी भी होंगे सम्मानित
आने वाले दिनों में अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी को जोहरा सहगल रंग सम्मान और रोहिताश गौड़ को ओमपुरी रंग सम्मान से नवाजा जाएगा।

- आज होगा पति गए रे काठियावाड़ का मंचन
नाट्य दल स्पर्श नाट्य रंग दिल्ली की ओर से शनिवार को अजीत चौधरी निर्देशित नाटक पति गए रे काठियावाड़ का मंचन किया जाएगा।
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‘बुल्ले शाह ’ के सशक्त मंचन ने कराई जीवन मूल्यों की अनुभूति
- महान सूफी बुल्ले शाह पर नाटक के जरिए पंजाब की समृद्ध जीवन संस्कृति को भावपूर्ण तरीके से पेश किया गया
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
वर्तमान पाकिस्तान के शहर कसूर में जन्मे महान सूफी बुल्ले शाह के जीवन मूल्यों को नाटक के जरिए सशक्त तरीके से एक श्रद्धांजलि के तौर पर पेश किया गया। गुरतेज मान ने बुल्ले शाह के किरदार में जान फूंक दी। अपने से नीची जाति का गुरु शाह इनायत को चुनने पर उनका विरोध हुआ। लेकिन उन्होंने अपने काफियां के जरिए जाति व्यवस्था पर प्रहार किया। विरोध के बावजूद गुरु के प्रति बुल्ले शाह के अटूट प्रेम का गुरतेज मान ने जीवंत मंचन किया। एक गलतफहमी के बाद शाह इनायत और बुल्ले शाह की मुलाकात के दृश्य में कलाकारों ने अपने अभिनय से जान फूंक दीं।
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निर्देशक केवल धारीवाल ने बुल्ले शाह के जीवन को बहुत ही खूबसूरती के साथ पेश किया। इसके साथ लेखक शाहिद नदीम ने नाटक के दृश्यों को सहजता के साथ पिरोया है। नाटक के एक दृश्य में अपने गुरु शाह इनायत को मनाने के लिए बुल्ले शाह तवायफ के कोठे पर जाते हैं और उसे अपना गुरु बनने की गुजारिश करते हैं। कहते हैं कि उन्हें नाच सीखना है, जिससे वह अपने गुरु को मना सकें। नाटक का यह दृश्य खूबसूरत है। इस दृश्य के दौरान संगीत और गायकों ने समां बांध दिया है। निर्देशक केवल धारीवाल ने बताया कि नाटक बुल्ले शाह की जीवन की घटनाओं से प्रेरित है। अपने गुरु शाह इनायत के प्रति उनके समर्पण, असहिष्णु पादरियों, भ्रष्ट नवाओं के साथ उनके संघर्ष, युद्ध के विरोध एवं धर्म के नाम पर खून-खराबा व समाज में जाति व्यवस्था के दृश्यों को नाटक में प्रभावशाली तरीके से शामिल किया गया है। नाटक के अन्य कलाकारों में गुरजेज पंडित, पवनदीप, राजिंदर नागी, सरबजीत लाड़ा, अभिषेक, सुखविंदर विर्क, सपना, पावेल संधू, दीपक कुमार, कासूरी विकास जोशी, रणजोध सिंह, अरविंदर कौर धारीवाल, हरमन, हिमांशु और मंजिंदर ने अपने किरदारों को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया।
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