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टीवी मरीजों की रिर्पोटिंग का बदला प्रारूप

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टीबी के मरीज की जानकारी छुपाने पर डॉक्टर को भी हो सकती है जेल
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-स्वास्थ्य मंत्रालय के रिपोर्टिंग प्रारूप में हुए बदलाव पर हुई बैठक

फोटो...एसएनजे नंबर चार व सात

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी के मरीजों की रिपोर्टिंग के प्रारूप को बदल दिया है। रोगी की जानकारी छुपाने पर डॉक्टर को जेल भी हो सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि अगर डॉक्टर मरीज की जानकारी नोडल अधिकारी या स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता से सांझा नहीं करता तो वह स्वयं व अस्पताल प्रबंधन और दवा दुकानदार पर कार्रवाई होगी।
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प्रारूप को लेकर बुधवार को सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. इंदू (टी.बी.) की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बदले गए रिपोर्टिंग प्रारूप की जानकारी दी गई। डॉ. इंदू ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने टी.बी. की रिपोर्ट तैयार करने का एक अलग प्रारूप जारी किया है। इसके तहत इसके मरीजों की पूरी जानकारी सांझा करनी पड़ेगी। नये प्रारूप के तहत अब टी.बी. के मरीज का नाम और पता की जानकारी ली जाएगी। उन्होंने बताया कि 2025 तक भारत टी.बी. मुक्त हो जाएगा। इसके लिए सही उपचार और पूर्ण उपचार चाहिए। बीच में उपचार छोड़ने पर नई मुसीबत पैदा हो जाती है। उन्होंने बताया कि टी.बी. के रोगी की जानकारी छुपाने पर डॉक्टर को जेल भी हो सकती है। इसको लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया हुआ है। अगर डॉक्टर टीबी मरीज की जानकारी नोडल अधिकारी या स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के साथ सांझा नहीं करता तो डॉक्टर, अस्पताल प्रबंधन और दवा दुकानदार पर आईपीसी की धारा 269 और 270 के तहत छह माह से लेकर दो साल तक की सजा और जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। वहीं जिला कैमिस्ट एसोसिएशन रोहतक के प्रधान रूबी चावला तथा जनरल सेक्रेटरी जोगेंद्र दलाल ने सभी कैमिस्ट की तरफ से भारत को टी.बी. मुक्त करने के लक्ष्य को हासिल करने में बढ़ चढ़कर योगदान देने का आश्वासन दिया। इस मौके पर जिला ड्रग कंट्रोलर मंदीप मान भी उपस्थित रहे।
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