लोगो छोटूराम स्टेडियम: व्यवस्थाएं बदहाल
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कहीं पानी नहीं तो कहीं दरवाजे खराब.... शौचालयों में कैसे जाएं खिलाड़ी
-छोटूराम स्टेडियम में शौचालयों की बदहाल स्थिति से परेशान महिला खिलाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। 25 से 30 राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने वाले छोटूराम स्टेडियम में शौचालयों की हालत खस्ताहाल है। इन शौचालयों में कहीं पानी की व्यवस्था नहीं है तो कहीं शौचालयों के दरवाजे खराब हैं। स्टेडियम में पुरुष शौचालय में लघुशंका के लिए सीटें व पानी की व्यवस्था तक नहीं हैं।
एक ओर तो सरकार शौच मुक्त भारत बनाने के लिए इतने प्रयास कर रही है तो दूसरी ओर सरकार के प्रयासों की पोल छोटूराम स्टेडियम जैसे स्थानों पर खुल रही है। शहर के छोटूराम स्टेडियम में हर रोज सैकड़ों की संख्या में खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। स्टेडियम में शौचालय तो है, लेकिन इन शौचालयों की हालत बदहाल है। नाम न छापने की शर्त पर खिलाड़ियों ने बताया कि स्टेडियम में महिला शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि बहुत सी खिलाड़ी घर पर ही शौैच करके आती हैं। एक खिलाड़ी ने तो यहां तक कहा कि वे केवल इसलिए पानी नहीं पीतीं कि उनको शौचालय न जाना पड़े। महिला खिलाड़ियों ने बताया कि स्टेडियम में जूडो हाल के पास एक शौचालय है, जहां पर अन्य खिलाड़ी अभ्यास करते हैं व पास ही दर्शकों के लिए बनीं सीढ़ियों पर भी खिलाड़ी व उनके परिजन बैठे रहते हैं। जिस कारण वे शौचालय जाने में हिचकती हैं।
नहीं होता पानी
खिलाड़ियों ने बताया कि जूडो हाल के पास बने शौचालय में न तो पानी होता है और न ही वहां के दरवाजे सही से बंद होते हैं। महिला खिलाड़ियों ने बताया कि स्टेडियम में बने कार्यालय में एक शौचालय है। उस शौचालय में महिला खिलाड़ियों के साथ-साथ पुुरुष खिलाड़ी भी शौच एवं लघुशंका के लिए जाते हैं। उन्हें वहां पर अकेले जाने में डर लगता है।
अमर उजाला ने की पड़ताल
खिलाड़ियों की शिकायत के बाद कार्यालय के पास बने पुरुष शौचालय में अमर उजाला की टीम ने जाकर देखा तो वहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं मिली। यहां लघुशंका के लिए बनाई गई चार सीटों में केवल एक ही सीट है, और उस सीट में भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इस शौचालय में शौच के लिए लगाई गई सीटों पर फ्लश की कोई सुविधा नहीं है।
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खिलाड़ियों को सभी सुविधाएं मुहैया कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। मामले की जांच करवाई जाएगी, अगर कोई दिक्कत मिलती है तो उसे दूर किया जाएगा।
-डॉ. यश गर्ग, डीसी रोहतक