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प्रबंधन ने अंदर से तो अभिभावकों ने बाहर से जड़ा स्कूल पर ताला, बुलाई पुलिस

Sat, 14 May 2016 01:21 AM IST
कुरुक्षेत्र ब्यूरो/ अमर उजाला
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क्लास - फोटो : demopic
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नियम 134 ए के तहत दाखिलों को लेकर स्कूल प्रबंधन और अभिभावकाें का झगड़ा अब पुलिस तक पहुंच गया है। मेधावी विद्यार्थियों को स्कूल में प्रवेश नहीं देने और छात्रा को 4 घंटे तक क्लास से बाहर खड़ा रखने के आरोप में शुक्रवार को शिक्षा भारती स्कूल के बाहर हंगामा हो गया। गुस्साए अभिभावकों ने रामनगर स्थित शिक्षा भारती विद्यालय के बाहर पहुंचकर बवाल काट दिया।
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स्कूल के कर्मचारियों ने उन्हें अंदर घुसने नहीं दिया और गेट पर अंदर से ताला जड़ दिया। मामला बढ़ा तो अभिभावकों ने भी गेट पर बाहर से ताला जड़ दिया। फिर, स्कूल के दूसरे गेट से प्रवेश किया और प्राचार्या कक्ष को घेर लिया। स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच ढाई घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला। परेशान प्राचार्या ने पुलिस कंट्रोल रूम में सूचना दी। आर्य नगर पुलिस चौकी और सिविल लाइन थाने के इंचार्ज टीम लेकर स्कूल पहुंचे। अभिभावकों ने प्राचार्या पर मनमानी का आरोप लगाते हुए दुखड़ा रोया। इसके बाद, दोनों पक्षों ने एक कमरे में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दी। 

हुआ यूं कि शुक्रवार सुबह 9 बजे ही दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन के नेतृत्व में दूर-दराज से अभिभावक एकजुट हो गए थे। सुबह 11 बजे आंदोलन के अध्यक्ष एडवोकेट सत्यवीर सिंह हुड्डा के पहुंचने पर काफी संख्या में अभिभावक स्कूल की ओर बढ़े। सुबह 11:15 बजे कर्मचारियों द्वारा स्कूल का गेट बंद किए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने स्कूल पर बाहर से ताला जड़ दिया। दूसरे गेट से अंदर घुस प्राचार्या डॉ. निर्मल पोपली के कक्ष में डेरा डाल दिया। प्राचार्या ने खुद को असहाय बताते हुए नियम 134ए के तहत दाखिला देने से मना कर दिया तो अभिभावक नाराज हो गए।
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हुड्डा ने कहा कि जब तक बच्चों का दाखिला नहीं हो जाता वे यहीं बैठे रहेंगे। काफी देर तक हुड्डा, अभिभावक और प्राचार्या ने एक-दूसरे के ऊपर आरोप लगाए। पौने 12 बजे प्राचार्या ने पुलिस को फोन कर दिया। सवा 12 बजे पुलिस ने आकर मोर्चा संभाला और प्राचार्या नदारद हो गईं। दोपहर 12:39 बजे सिविल लाइन थाने के एसएचओ रमेश कुमार और आर्य नगर चौकी इंचार्ज अनिल कुमार पहुंचे तो प्राचार्या ने अलग से बातचीत करने को कहा। प्राचार्या और एसएचओ की मौजूदगी में ही अभिभावकों ने अपना दुखड़ा रोया। दोपहर 1 बजे, अभिभावक डीईओ कार्यालय पहुंचे और डीईओ सुनीता रूहिल को अपनी शिकायत दी। जिसमें स्कूल की प्राचार्या के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। 
मेरा बेटा मर गया है, कहां से दाखिला फीस दूं
एसएचओ रमेश कुमार और आर्य नगर चौकी इंचार्ज अनिल कुमार की मौजूदगी में महावीर कालोनी की देवी बाई ने पीड़ा सुनाई। उन्होंने बताया कि स्कूल वालों ने फोन किया कि जब तक दाखिला फीस नहीं देंगे, आपके बच्चे को बाहर रखा जाएगा। जबकि, मैंने दो दिन पहले ही दो महीने की फीस पीएनबी बैंक में जमा करा दी है। यह सब करने के बावजूद भी स्कूल प्रबंधन मानने को तैयार नहीं। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली मेरी पोती को चार घंटे क्लास से बाहर रखा गया।

सुबह से भूखी होने के कारण बच्ची की तबीयत भी खराब हो गई। देवी बाई ने हाथ जोड़ते हुए कहा कि साहब... सात महीने पहले मेरे इकलौता बेटा की मौत हो गई और यह मेरी गोद ली हुई पोती है। मैं अपनी पोती को पढ़ा लिखाकर अपने बेटे के सपने को पूरा करना चाहती हूं। लेकिन मेरी पीड़ा कोई समझने वाला नहीं है। मैं फीस भरने में असमर्थ हूं। यह फीस भी बड़ी मुश्किल से उधार लेकर जमा कराई है। मैं फीस नहीं भर सकती, इसलिए नियम 134ए के तहत अपनी पोती को पढ़ाना चाहती हूं।

छात्रा को खड़ा नहीं किया, लाइब्रेरी में बैठाया: पोपली
स्कूल प्राचार्या डॉ. निर्मल पोपली ने बताया कि उन्होंने छात्रा को क्लास से बाहर नहीं निकाला था, लाइब्रेरी में बैठाया था। बच्ची की दादी झूठ बोल रही है। उन्होंने बताया कि पहले ही स्कूल प्रबंधन की ओर से करीब 150 बच्चों को नि:शुल्क और कम फीस पर पढ़ाया जा रहा है। झुग्गी झोपड़ियों और शनीचरों के बच्चों को संस्कार स्कूल द्वारा नि:शुल्क पढ़ाया जा रहा है।

200 बच्चों ने फीस माफी के लिए आवेदन कर रखा है। ऐसी स्थिति में कैसे नियम 134ए के तहत बच्चों को दाखिला दें। इससे स्कूल प्रबंधन पर और बोझ बढ़ेगा। अगर ऐसा चलता रहा तो स्कूल के सभी खर्चे और शिक्षकाें की फीस कहां से पूरी करेंगे। स्थिति से शिक्षा अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है कि वे इन बच्चों को दूसरा स्कूल अलॉट कर दें। इस मामले में शिक्षा अधिकारी और प्रबंधन की ओर से जैसे ही आदेश मिलेंगे, मैं वैसा कर दूंगी।
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