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राजनीतिक गलियारों में नगर निगम मेयर की चर्चा

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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक। नगर निगम के मेयर का पहली बार पब्लिक सीधा चुनाव करेगी। रोहतक सिटी, कलानौर व गढ़ी सांपला हलके में फैले निगम में मेयर की कुर्सी तक पहुंचने के लिए सटीक जातिगत समीकरण, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व भाजपा के सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर की पसंद व नापसंद को राजनीतिक गलियारों में अहम माना जा रहा है। शॉरी क्लाथ मार्केट के प्रधान गुलशन ईशपुनियानी तक मेयर की दौड़ में शामिल हो गए हैं, जो जल्द पूर्व सीएम हुड्डा से टिकट के लिए आशीर्वाद मांगेंगे।
नगर निगम की सियासत पर नजर रखने वालों का मानना है कि पब्लिक द्वारा सीधे चुनाव कराने के कारण मेयर की कुर्सी तक पहुंचना पहले की अपेक्षा कठिन हो गया है। अब राजनीतिक दल स्थानीय चुनाव कहकर पीछे नहीं हट सकेंगे, बल्कि पार्टी के चुनाव चिन्ह पर मजबूत प्रत्याशी उतारने होंगे। रोहतक निगम मेयर के चुनाव को लेकर कई तरह के कयास लग रहे हैं। एक पूर्व पार्षद ने बताया कि कांग्रेस की टिकट पर जीत के लिए हुड्डा परिवार का साथ होना जरूरी है। अगर कांग्रेस गैर जाट प्रत्याशी मैदान में उतारती है और हुड्डा परिवार जीत के लिए जोर लगाता है तो भाजपा के पास उसकी काट ढूंढना आसान नहीं रहेगा। पूरा रोहतक जिला ही हुड्डा का गढ़ रहा है। ऐसे में जाति से ऊपर उठकर हुड्डा के नाम पर वोट मिल सकती हैं। अगर जाट प्रत्याशी मैदान में आता है तो कांग्रेस पर जाति विशेष से जुड़ाव का आरोप लग सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस के निवर्तमान पार्षदों में सभी मेयर की दौड़ में खुद को शामिल मान रहे हैं, इसमें जाट व गैर जाट दोनों हैं। हर किसी को लगता है कि निवर्तमान मेयर रेनू डाबला की तरह उनकी भी किस्मत में भी कुर्सी आ सकती है।
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भाजपा में मंत्री की पसंद, नापसंद रहेगी अहम
उधर, भाजपा में स्थानीय विधायक एवं सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर की मेयर पद के लिए पसंद व नापसंद काफी अहम रहेगी। क्योंकि निगम में आधे से ज्यादा वार्ड रोहतक विधानसभा क्षेत्र से ही हैं। दूसरा, पार्टी ने उन्हें ही रोहतक निगम चुनाव का प्रभारी बना दिया है। निवर्तमान पार्षदों के अलावा भाजपा के करीबी नेताओं को भी लग रहा है कि वे मेयर बन सकते हैं।

इनेलो का रुख भी रहेगा अहम, किसे मैदान में उतारती है पार्टी
कांग्रेस व भाजपा के बाद इनेलो का शहर में जनाधार माना जा रहा है। मेयर के चुनाव में पार्टी किसको टिकट देती है। प्रत्याशी किस समुदाय से होगा। इस पर भी कांग्रेस व भाजपा प्रत्याशी की जीत का गणित निर्भर रहेगा।
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विधानसभा का सत्र शुरू, पहले दिन नहीं हुआ प्रस्ताव पेश
उधर, चंडीगढ़ में शुक्रवार से विधानसभा का सत्र शुरू हो गया, लेकिन पहले दिन मेयर का सीधा चुनाव कराने के लिए भाजपा की तरफ से कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सका। संभव है कि अब सोमवार को सत्र के दूसरे दिन प्रस्ताव आ सकता है, जिसे दो-तिहाई बहुमत से पास किया जाना अनिवार्य है। तभी नगर निगम एक्ट 1994 में संशोधन हो सकेगा।
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