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सीएम अंकल हमें पढ़ना है, ट्रेन से कटकर नहीं मरना...

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सीएम अंकल हमें पढ़ना है, ट्रेन से कटकर नहीं मरना है.....
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चरखी दादरी।
अब तक सियासत की भेंट चढ़ता आया गांधी नगर अंडरपास मुद्दा परवान न चढ़ने से बच्चों, बुजुर्ग व महिला वर्ग सहित करीब 20 से 25 हजार लोग परेशानियां झेलने को मजबूर है। रेलवे पैदल राहगीरों के लिए यहां 2.0 गुणा 1.8 मीटर अंडरपास बनाने को तैयार है, लेकिन सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हो पा रही। अब तक न तो रेलवे के पास बजट संबंधी कोई स्वीकृति पहुंची है और न ही कोई प्रपोजल। सीसीआई फाटक बंद होने के बाद से ही महज 200 मीटर की दूरी गांधी नगरवासियों को करीब डेढ़ किलोमीटर का सफर तय कर पूरी करनी पड़ रही है। समय बचाने के प्रयास में अगर रेलवे ट्रैक से गुजरते हैं तो इसके लिए जान हथेली पर रखकर प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेनों के नीचे से जाना पड़ता है। बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर घर पहुंचने तक अभिभावकों को हादसा घटित होने का अंदेशा सताता रहता है। जान दांव पर लगाकर रेलवे ट्रैक पार करने के माजरे को अज्ञात ने अपने मोबाइल में कैद कर सोशल साइट पर भी हाल ही में एक वीडियो पोस्ट किया है। इस पोस्ट को अब तक 3200 लोग देख चुके हैं जबकि 42 लोगों ने इसेे शेयर भी किया है। रविवार को गांधी नगर क्षेत्र के स्कूली बच्चे छुट्टी के बावजूद यूनिफॉर्म पहनकर ट्रैक पर आ पहुंचे। कुछ छात्राएं तो रोष स्वरूप ट्रैक पर लेट गई। छात्रा प्रियंका ने स्कूली बच्चों की अगुवाई करते हुए सीएम अंकल हमें पढ़ना है, ट्रेन से कटकर नहीं मरना है.....स्लोगन की पट्टी हाथ में लेकर नारेबाजी करवाई।
स्कूली बच्चे बोले: ट्रेनों के नीचे से गुजरने में हमें आती हैं परेशानियां
1. स्कूल जाने में काफी परेशानी होती है। स्कूल से आते व जाते समय माल गाड़ी हमेशा खड़ी रहती है। जिसके कारण ट्रेन के नीचे से गुजरना पड़ता है।
आशु, छठी कक्षा छात्रा
2. स्कूल जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है और अधिकतर ट्रेन रेलवे लाइनों पर खड़ी मिलती है। परिजनों को भी हादसे की चिंता सताती रहती है। कई बार ट्रेनों के आवागमन के कारण स्कूल पहुंचने में देरी होती है।
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ममता, सातवीं कक्षा छात्रा
3 सुबह-शाम ट्रैक पार करते समय अप्रिय घटना घटित होने का खतरा बना रहता है। पिछले काफी समय से स्कूल जाने के लिए ट्रेन के नीचे से गुजरने को मजबूर हैं।।
भावना, सातवीं कक्षा छात्रा
4 अंडर पास बनने के बाद सभी स्कूली बच्चों को स्कूल जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। रेलवे विभाग ने अब तक स्कूली बच्चों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
दिव्या, चौथीं कक्षा छात्रा
बच्चों को स्कूल भेजने के बाद भय के साये में रहते है अभिभावक
1 अंडर पास की मांग पिछले लंबे समय से बनी हुई है। बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर उनके घर लौटने तक अभिभावकों को उनकी चिंता लगी रहती है। ट्रेनों के नीचे से गुजरने पर न जाने कब कोई हादसा घटित हो जाए।
मंजू, गांधी नगर निवासी
2 अंडर पास न बनने से ट्रेन के नीचे से होकर गुजरना पड़ता है। महिलाओं को भी इसके चलते दिक्कतें होती हैं। इस मांग को जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए ताकि हादसा घटित होने की संभावना ही न रहे।
बिमला, गांधी नगर निवासी
3 अंडर पास की कमी के कारण काफी दूर से घुमकर आना पड़ता है। इस कारण लोगों के समय के साथ-साथ आर्थिक परेशानियां भी होती है। हर समय जान दांव पर लगाकर ट्रेन के नीचे से नहीं गुजर सकते। रेलवे को अंडर पास बनवा देना चाहिए।
कलावती, गांधी नगर निवासी
4 रेलवे ट्रैक पर अधिकतर समय माल गाड़ी खड़ी रहती है जिसके कारण ट्रेन के नीचे से होकर गुजरना पड़ता है। बुजुर्ग लोगों को ट्रेन के नीचे से निकलने
में अधिक परेशानी होती है। बच्चों को भी जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।
निर्मला, गांधी नगर निवासी
ट्रेनें हुई लेट, यात्रियों के बनते-बनते रह गए काम
1 रेवाड़ी जाने के लिए पिछले दो घंटो से प्लेटफार्म पर खड़ा हुआ है। ट्रैक जाम करने के कारण ट्रेन नहीं आई। रेवाड़ी समय पर पहुंचना ज्यादा जरूरी था लेकिन मैं लेट हो गया।
राजकुमार, रेवाड़ी
2 किसी निजी काम से हिसार गया था। ट्रेन न आने के कारण सारा दिन खराब हो जाएगा। जब तक ट्रैक नहीं खुलेगा तब तक ट्रेन नहीं आएगी जबकि मेरा पहुंचना जरूरी है।
मुकेश, कनीना
3 कोसली से हिसार जाने के पूरा दिन खराब होगा। किसी निजी काम से पहुंचना जरूरी है लेकिन प्लेटफार्म पिछले डेढ़ घंटे से इंतजार कर रहा है, ट्रेन अब तक नहीं आई।
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सुनील, कोसली
4 जरूरी काम से हिसार जाना था। ट्रेन में समय कम लगता है इसलिए ट्रेन में सफर करता हूं, लेकिन आज ट्रैक जाम होने से ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंची ही नहीं है। सतपाल, कोसली
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