शहर के सबसे पुराने जलघर को आधुनिक करने के लिए पब्लिक हेल्थ ने लगवाया ऑटोमैटिक सिस्टम
- चहेती कंपनी को ठेका देने के लिए 85 लाख के स्काडा सिस्टम के टेंडर के किए 8 टुकड़े
- एक ही कंपनी को जारी किये गये सभी टेंडर, पूरे सिस्टम के एक टेंडर से बच सकते थे लाखों रुपये
- जल घर के वाटर टैंकों की क्षमता बढ़ाने की जगह स्काडा सिस्टम लगाने में किये लाखों खर्च
संजय कुमार
रोहतक।
शहर के सबसे पुराने जल घर एक के वाटर टैंकों की क्षमता बढ़ाने की बजाये पब्लिक हेल्थ विभाग ने यहां 85 लाख रुपये का आधुनिक स्काडा सिस्टम लगाया है। इस सिस्टम के लगवाने के लिए टेंडर जारी किया जाना था। अपनी चहेती कंपनी को टेंडर दिलाने के लिए विभाग ने इस एक सिस्टम के टेंडर के आठ से नौ टुकड़े कर दिये। टेंडर जारी हुए और हैरत की बात है कि सभी टेंडर एक ही कंपनी को जारी किए गए।
अब सवाल उठ रहे हैं कि विभाग को जब एक सिस्टम पूरा लेना था तो उसके कंपोनेंट को लेकर अलग-अलग टेंडर लगाने की क्या जरूरत थी। ये अलग-अलग टेंडर भी अलग-अलग एजेंसियों की बजाए एक ही एजेंसी को अलॉट हुआ है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि यदि पूरा सिस्टम कोई एक बड़ी कंपनी उपलब्ध कराती तो वह विभाग को क्या सस्ता नहीं पड़ता।
क्या है स्काडा
सोनीपत रोड स्थित जल घर एक को भी विभाग ने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर दिया है। यहां स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वीजीशन) सिस्टम लगया गया है, जिससे एक व्यक्ति भी सारी सप्लाई को महज चंद बटन दबा कर ऑपरेट कर सकता है। जल घर एक अब जल घर तीन की तर्ज पर आधुनिकता में किसी से कम नहीं है।
अधिकारी बोले - पहले जलघर की क्षमता बढ़ाते
दो फाड़ में बंटे विभाग के ही कुछ अधिकारी सवाल उठा रहे हैं कि पहला तो जल घर एक को स्काडा जैसे सिस्टम की जरूरत नहीं थी। क्योंकि इससे अधिक महत्वपूर्ण जल घर एक के वाटर टैंकों की क्षमता बढ़ाना था। इसके लिए विभाग वाटर टैंकों में जमा मिट्टी को साफ करवा कर अपनी पानी स्टोरेज की क्षमता को बढ़ा सकता था। लेकिन विभाग ने अपनी मूल जरूरत को पूरा करने की बजाये जल घर को आधुनिक बनाने में बजट का प्रयोग किया। अब स्थिति यह है कि जल घर एक के उपभोक्ताओं की पेयजल आपूर्ति के लिए हुडा के जल घर से पानी लेना पडे़गा। जब पानी वहां से आएगा तो पब्लिक हेल्थ विभाग अपने आधुनिक सिस्टम से उपभोक्ताओं को पानी सप्लाई में देगा।
एक कंपनी से कोई सिस्टम लेते हैं तो पड़ता है काफी सस्ता
पब्लिक हेल्थ विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोई भी सिस्टम यदि टुकड़ों में लिया जाता है तो वह तो महंगा पडे़गा ही। यदि विभाग पूरा टेंडर निकालता तो बड़ी एजेंसियां सामने आती और सिस्टम कम दाम में उपलब्ध होता। टुकड़ों में टेंडर निकाल कर विभाग ने अपनी कागजी कार्रवाई पूरी कर ली, लेकिन सिस्टम महंगा लिया है।
बोले अधिकारी
सिस्टम के लिए अलग-अलग कंपोनेंट के लिए अलग-अलग टेंडर ओपन किये गए थे। जिस एजेंसी ने कम कीमत भरी उसे अलाटमेंट दी गई। इसमें कहीं पर कोई गड़बड़ी नहीं है, सारी टेंडरिंग प्रक्रिया आन लाइन की गई है। कुछ ठेकेदार और कुछ अन्य लोग बेवजह सवाल उठाते रहते हैं।
- भानू प्रताप, कार्यकारी अभियंता, पब्लिक हेल्थ विभाग