करौंथा स्थित सतलोक आश्रम में बिगड़ रहे हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने मंगलवार दोपहर बाद धारा-144 के तहत कार्रवाई करते हुए आश्रम को लेकर खाली कराने का काम शुरू किया।
शाम तक कड़ी सुरक्षा के बीच हजारों अनुयायियों को इस आश्रम से हटाकर बरवाला के आश्रम पहुंचाने का काम जारी रहा लेकिन करीब सात बजे अनुयायियों ने आश्रम के दरवाजे बंद कर लिए, जिससे गतिरोध उत्पन्न हो गया था।
इसके बाद पुलिस महानिदेशक ने स्वयं आश्रम में जाकर अनुयायियों को मनाया और करीब ढाई घंटे के गतिरोध के बाद अनुयायियों को आश्रम से निकालने का काम फिर से शुरू हो गया।
प्रशासन ने रोडवेज की 42 बसों और 70 निजी वाहनों की मदद से सैकड़ों अनुयायियों को आश्रम से निकाल कर इलाके से बाहर भिजवा दिया था।
इससे पहले सतलोक आश्रम खाली करवाने को लेकर आर्य समाजियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को दोपहर बारह बजे तक का अल्टीमेटम दिया था था।
बारह बजे के बाद उस समय स्थिति तनाव पूर्ण हो गई जब आर्यसमाजी और ग्रामीणों ने आश्रम को चारों तरफ से घेर लिया।
इसके बाद अधिकारियों ने आश्रम के अंदर जाकर अनुयायियों से बात की और आश्रम खाली करने को कहा। पता चला है कि इस बारे में अनुयायियों की रामपाल दास से भी बात कराई गई।
इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच आश्रम को खाली करने का काम शुरू कर दिया गया।
शाम तक करीब तीन हजार अनुयायिओं को बाहर निकाला जा चुका था, लेकिन इसके बाद अनुयायियों ने आश्रम का मुख्य द्वार बंद कर दिया, जिसे लेकर फिर से टकराव की स्थिति पैदा हो गई।
मंगलवार सुबह गांव करौंथा में आसपास के ग्रामीणों का तांता लगना शुरू हो गया था। सतलोक आश्रम से पहले सड़क पर प्रमिला के शव के साथ बैठे ग्रामीणों की बैठक हुई।
बैठक में ग्रामीणों व आर्य समाजियों ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दिया कि दोपहर बारह बजे तक अगर आश्रम खाली नहीं करवाया गया तो वे स्वयं आश्रम खाली करा लेंगे।
करीब दस बजे तक करौंथा में हजारों लोग एकत्रित हो गए थे, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक थी।
महिलाओं ने हाथों में जेली, गंडासे व अन्य हथियार थाम रखे थे। ग्रामीणों के अल्टीमेटम को देखते हुए जिला प्रशासन के अधिकारियों की पुलिस महानिदेशक के साथ बैठक हुई।
करीब बारह बजे पुलिस महानिरीक्षक अनिल राव, मंडलायुक्त चंद्र प्रकाश, जिला उपायुक्त विकास गुप्ता, झज्जर के उपायुक्त सहित आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को मनाने की कोशिश की।
ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि पहले आश्रम खाली कराया जाए, उसके बाद ही आगे कोई बात होगी।
इसके बाद उपायुक्त ने करौंथा स्थित सतलोक आश्रम के पास धारा-144 लागू करने के आदेश जारी करते हुए अनुयायियों को लाउड स्पीकर से आश्रम खाली करने को कहा।
इस दौरान उपायुक्त ने ग्रामीणों को भी बताया कि आश्रम को खाली कराया जा रहा है, इसलिए वे संयम बरते।
जब अधिकारी आश्रम का दरवाजा खुलवाने के लिए पहुंचे तो अनुयायियों ने दरवाजा खोलने से इंकार कर दिया। आखिरकार प्रशासन ने जेसीबी बुलाकर आश्रम का दरवाजा तोड़ दिया।
इस दौरान अधिकारियों ने आश्रम के संचालक रामपाल दास से संपर्क किया और अनुयायियों से आश्रम खाली कराने पर सहमति बना ली। पुलिस महानिरीक्षक ने आश्रम के अंदर जाकर अनुयायियों से बात की।
दोपहर करीब तीन बजे आश्रम खाली करने की प्रक्रिया शुरू हुई और रोडवेज की बसों को आश्रम के मुख्य गेट पर लगा दिया गया।
पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच आश्रम से अनुयायियों को निकालना शुरू किया और यह काम शाम तक जारी रहा।
शाम तक 42 बसों और 70 निजी वाहनों में अनुयायियों को बरवाला आश्रम भेजा जा चुका था। लेकिन करीब साढे़ सात बजे अनुयायियों ने आश्रम का मुख्य गेट बंद कर दिया।
पुलिस अधिकारियों ने गेट खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने।
पुलिस महानिदेशक एसएन वशिष्ठ मौके पर डटे
करौंथा आश्रम को लेकर पुलिस महानिदेशक एसएन वशिष्ठ दूसरे दिन भी रोहतक में डेरा डाले रहे। दोपहर को उन्होंने करौंथा पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से विचार विमर्श किया।
देर शाम को अनुयायियों ने आश्रम का दरवाजा बंद किया तो जिला प्रशासन की चिंता बढ़ गई। अधिकारियों ने फिर से रणनीति बनानी शुरू कर दी है।