रेवाड़ी। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस को लेकर सभी को सचेत रहना होगा। यदि अभी उसका संरक्षण नहीं किया गया तो फिर आगे चल कर लोगों को खुले वातावरण में सांस लेने के लिए भी सोचना पड़ेगा। अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्लास्टिक के उपयोग में कटौती करना होगा। मानव जाति को प्रकृति संरक्षण की गंभीरता को समझना होगा।
प्रकृति के मूल तत्वों, हवा, पानी, आग, वन, जीव-जंतु, गैस यानी आकाश और पृथ्वी यानी मृदा के संरक्षण के प्रति सजगता फैलानी होगी। इसके लिए ही केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से एकल इस्तेमाल प्लास्टिक पर पाबंदी लागू कर इस उद्देश्य की पूर्ति के अपने अपने संकल्प को स्पष्ट कर दिया ताकि मानव समाज प्रकृति की सेवा करने की प्रेरणा ले सके।
प्रर्यावरण को बचाने के लिए सरकार की ओर से अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही एकल इस्तेमाल प्लास्टिक पर पाबंदी के बाद पॉलिथीन में सामान बेचने के अलावा निर्धारित सीमा से कम मोटाई वाली प्लास्टिक एवं अन्य ठोस कचरा पैदा करने वाले सामान पर पाबंदी लगाई गई है।
उधर, वन विभाग प्रकृति को बचाने के लिए जिले में 14 लाख 30 हजार से अधिक पौधे इस मानसून सीजन और चालू साल के अंत तक रोपित कराने जा रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकार की दो अलग-अलग योजनाओं के तहत यह पौधरोपण कार्य होगा। 5 लाख से अधिक पौधे नि:शुल्क बांटकर इनका रिक्त जगह पर रोपण होगा। सरकारी विभाग, सामाजिक, शिक्षण एवं धार्मिक संस्थाओं का सहयोग लेकर पौधरोपण मुहिम को साकार रूप दिया जाएगा।
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जल संरक्षण पर दिया जा रहा जोर
प्रकृति को बचाने के लिए बारिश के पानी के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में 40 लाख रुपये खर्च करके चार जगह पर वाटर पिट बनाए हैं, जिनमें माध्यम से बारिश के पानी को जमीन के अंदर भेजा जाएगा।
शहर में ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर जल योजना के तहत सभी नलों पर टोंटियां लगाने के अलावा सभी पेयजल कनेक्शनों को वैध करने का अहम निर्णय लिया गया है। साथ ही घर से निकलने वाले पानी को जमीन में भेजने के लिए पंचायतों के सहयोग से सोखता गड्ढा बनवाया। जिले के खंड खोल के 40 गांवों में इन दिनों अटल भूजल योजना के तहत जल संरक्षण कार्य चल रहा है, जिसके तहत लोगों को जल बचाने के लिए जागरूक करने के अलावा जल संरक्षण के तरीके बताए जा रहे हैं। सरकार ने प्रकृति संरक्षण को लेकर जिले के गांवों में नए तालाबों की खोदाई के अलावा पुराने उन तालाबों, जो गंदे पानी से लबालब भर गए थे, उनको खाली कराकर खोदाई कराई ताकि जमीन में पानी जाने से भूजल स्तर ऊंचा उठ सके। इसके अलावा साहबी नदी में नहरी पानी डालने की दिशा में भी सकारात्मक कार्य हुआ है।
मानव मात्र में प्रकृति के प्रति प्रेम जागृत करने के लिए मनाया जाता है विश्व प्रकृति दिवस
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस को 28 जुलाई के दिन ही मनाने के पीछे एक ही मकसद है कि मानव मात्र में प्रकृति प्रेम जागृत किया जाए। लोग प्रकृति से मिलने वाली चीजों का सही प्रकार से जरूरत अनुसार इस्तेमाल करें। चाहे वह अन्न हो, पानी हो, हवा हो या फिर अग्नि, वनस्पति और जीव - जंतु हो। इनके अत्याधिक दोहन से प्राकृतिक असंतुलन की स्थिति पैदा होती है और मानसून में कम बारिश और गर्मी के दिनों में अधिक तापमान जैसी समस्याएं, चक्रवात, नई बीमारियां, प्राकृतिक आपदाएं सामने आती हैं।
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अधिकारिक कोट 1
जिले में इस मानसून के दौरान और साल के अंत तक नए पौधे लगवाने के लिए 14 लाख से अधिक पौधे नर्सरी में तैयार करा लिया गया है। सभी लोगों को प्रकृति संरक्षण में अपनी अहम भूमिका निभानी चाहिए।
- सुंदर लाल जिला वन अधिकारी।
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अधिकारिक कोट - 2
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर हम सभी लोगों को प्रकृति को सुरक्षित और संरक्षित करने का वचन लेना होगा। पंचायत विभाग और प्रदेश की सभी पंचायतें इस काम में सहयोग करेंगी। - एचपी बंसल, डीडीपीओ, रेवाड़ी।