रेवाड़ी। छोटा परिवार-सुखी परिवार को प्राथमिकता देने में महिलाएं पुरुषों से कहीं ज्यादा जागरूक हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसका प्रमाण है। जिले में अप्रैल से अक्तूबर तक मात्र 69 पुरुषों ने नसबंदी कराई है, जबकि इसकी तुलना में 1459 महिलाओं ने नलबंदी कराकर परिवार नियोजन में अहम भूमिका निभाई है।
स्वास्थ्य विभाग ने 2024-25 में 400 पुरुषों की नसबंदी व 3500 महिलाओं की नलबंदी करवाने का लक्ष्य रखा है। इसके मुताबिक अक्तूबर तक महज 69 पुरुषों ने करवाई। वहीं, 1459 महिलाओं ने नलबंदी कराई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जब पुरुषों की स्क्रीनिंग की तो पता चला कि उन्हें इस बात का भ्रम है कि नसबंदी करवाने पर शरीर में कमजोरी आ जाती है। दूसरा बड़ा कारण नसबंदी करवाने के बजाय अस्थायी विकल्प अपनाने में पुरुष अधिक दिलचस्पी दिखाते हैं।
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अप्रैल से अक्तूबर नसबंदी और नलबंदी का विवरण
माह पुरुष महिला
अप्रैल 08 164
मई 14 389
जून 19 353
जुलाई 09 180
अगस्त 06 106
सितंबर 10 189
अक्तूबर 03 78
कुल योग 69 1459
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन लगता है कैंप
स्वास्थ्य विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन व कोसली अस्पताल में सोमवार व शुक्रवार को नसबंदी जागरूकता कैंप लगाया जाता है, जिसमें चिकित्सक से लेकर कर्मचारी ऐसे दंपती की पहचान करते हैं, जिनमें पुरुष नसबंदी को लेकर भ्रम रहते हैं। ऐसे लोगों को नसबंदी से जुड़े तथ्यों की सटीक जानकारी दी जाती है। उन्हें नसबंदी करवाने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग आमजन को परिवार नियोजन के संसाधनों के इस्तेमाल करने के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
नसबंदी को लेकर पुरुषों में भ्रम की स्थिति है। इसे लेकर कैंप में जागरूक किया जा रहा है। इस साल अक्तूबर तक केवल 69 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई, जबकि इसी अवधि में 1459 महिलाओं ने नलबंदी करवाई है।
- डॉ. अशोक कुमार, उप-सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग रेवाड़ी।