रेवाड़ी। महिलाओं को कामकाजी होने के बाद भी कई प्रकार के संघर्ष से जूझना पड़ता है। उन्हें कामकाज के साथ घर की जिम्मेदारी भी यथावत निभानी पड़ती है। हमारे समाज का ढांचा ही कुछ इस प्रकार का है। समाज में महिलाएं पुरुषों के समान हैं, उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है, लेकिन अधिकारों का गलत इस्तेमाल भी ठीक नहीं है। उक्त बातें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सीजेएम वर्षा जैन ने कहीं हैं। वह अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बुधवार को आयोजित अपराजिता कार्यक्रम के दौरान मौजूद महिलाओं को संबोधित कर रहीं थीं। यह कार्यक्रम वन स्टॉप सेंटर व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से किया गया था।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल हो रहा है, जिससे रिश्तों में खटास आ रही है। सोशल मीडिया का सही प्रयोग करना चाहिए। समय-समय पर बच्चों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे न केवल स्वयं बल्कि आसपास की महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करें।
इस दौरान कार्यक्रम में शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महिला सशक्तीकरण समेत तमाम मुद्दों पर विचार रखे। कार्यक्रम में एक क़दम मानवता की ओर संस्था की संचालिका प्रियंका यादव का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सीजेएम वर्षा जैन ने कहा कि पत्नी अगर पति को परिवार से दूर करेगी तो वह फिर उसे भी उसके परिवार से दूर रखेगा। उनके पास बहुत से मामले आते हैं, जिनमें से 90 फीसदी शिकायतों में दर्ज तथ्य विचारों की उपज होते हैं। जबकि असलियत कुछ अलग होती है। संविधान ने महिलाओं को अधिकार दिए गए हैं, लेकिन हमें कर्तव्य भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मेरी नजर में वे लड़कियां बहादुर हैं, जो दूसरों की आवाज उठाती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वन स्टॉप सेंटर की संचालिका ललिता कालड़ा ने कहा कि यह सेंटर महिलाओं के मुद्दों पर धरातल पर काम करता है। समस्या होने पर यहां महिलाएं सहायता के लिए आती हैं। यह पहले ज्यादातर घरेलू हिंसा तक सीमित था, लेकिन अब दायरा और बढ़ गया है।
प्रियंका ने बताया कि पहले अत्याचारों से पीड़ित महिलाएं अपने थाना क्षेत्र में ही एफआईआर दर्ज करा सकती थी, लेकिन अब जीरो एफआईआर आने से कहीं भी पॉक्सो एक्ट का मामला दर्ज करवा सकते हैं।
इनकी रही सराहनीय भूमिका
लॉयनेस तृप्ति भार्गव, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की सदस्य डॉ. अनीता यादव, पूर्व सीडब्ल्यूसी सदस्य रजनी भार्गव, सिविल सोसाइटी मेंबर नीतू चौधरी, रमेश वशिष्ठ, अनुजा खुराना, संगीता यादव, रतना गोयल, एडवोकेट ममता, उर्वशी, वन स्टॉप सेंटर के सदस्य व आंगनबाड़ी वर्कर मौजूद रहे।
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महिलाओं को मिलेगा बल
अपराजिता मुहिम एक अच्छी पहल है। इससे महिलाओं को बल मिलेगा और नारी गरिमा को बरकरार रखने में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी। अपने हक के लिए महिलाएं आगे आ सकेंगी। शमा, निवासी नई आबादी
महिला सशक्तीकरण अहम मुद्दा
महिला सशक्तीकरण एक अहम मुद्दा है। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को बराबरी का हक नहीं मिल पा रहा है। किसी की काबिलियत का अंदाजा उसके जेंडर से नहीं, मेधा से होता है। -मंजू, निवासी संघी का बास
नारी गरिमा की प्रति करूंगी जागरूक
अभियान से जुड़कर अच्छा लगा। अपने परिवार के साथ रिश्तेदारों और दोस्तों को भी नारी गरिमा के सम्मान के लिए प्रेरित करूंगी। ऐसे आयोजनों से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलता है। ऐसे कार्यक्रमों को और ज्यादा कराए जाने की आवश्यकता है।
-किरण, निवासी तेजपुरा
महिला अधिकारों के प्रति जागरूक होना वक्त की मांग
महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार नहीं मिल सके हैं। आए दिन दहेज हत्या, महिला उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामले सामने आना इसका उदाहरण है। नारियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। -मेनका निवासी, रेवाड़ी
ऐसे कार्यक्रम सराहनीय
अमर उजाला की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम बेहद सराहनीय है। ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जानकारी मिलती है। साथ ही महिला सशक्तीकरण को भी बल मिलेगा। -नीरू, निवासी नई आबादी
नारी हमेशा अपराजिता
अपराजिता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाना बेहद सराहनीय है। अपराजिता नाम से ही महिलाओं में आत्मबल की भावना पैदा होती है। क्योंकि नारी हमेशा अपराजिता रही है। -राजबाला, निवासी सज्जन कॉलोनी