बेटी, बहन, मां व पत्नी सहित कई रूपों में महिलाएं घर चलाने से लेकर देश के लिए भी काम कर रही हैं। लेकिन समाज की कमजोर मानसिकता का खामियाजा भी इस मातृशक्ति को समय-समय पर झेलना पड़ा है। इसका ही एक उदाहरण है शहर के सेक्टर-3 निवासी महिला उपासना गुप्ता।
उपासना ने बताया कि करीब 10 साल पहले जब तीनों बेटियों को पिता की सबसे ज्यादा जरूरत थी वह अलग हो गए। ऐसे में अब उनके पास घर चलाने से लेकर बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने का जिम्मा आ पड़ा। उसने स्वावलंबन व शिक्षा को ही अपना सहारा बनाकर संघर्ष किया। इसी दौरान गुप्ता ने बड़ी बेटी अर्जिता को एमएससी, बीएड व दूसरी बेटी अर्पिता को बीटेक कराया। उनकी तीसरी बेटी समर्पिता दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पहली ईयर की पढ़ाई कर रही है। इसके साथ ही उपासना अपने माता-पिता से बिछड़े बच्चों को भी मिलाने की ठानी। लगातार सामाजिक संगठनों व प्रशासन के साथ मिलकर ऐसा करके भी दिखाया। एक 12 साल से बिछड़े बच्चे को उसके माता-पिता तक पहुंचाया। इसके अलावा ऐसे एक दर्जन से अधिक बच्चों को उन्होंने मां की गोद तक पहुंचाने का काम किया। पति से अलग होने के बाद उपासना ने जहां सास-ससुर की दुकान में हाथ बटाना शुरू किया, वहीं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम रखा। इसी का परिणाम था कि परिवार को संभालने के साथ ही उन्होंने समाज में खुद की अलग से पहचान बनाई तो नारी गौरव अवॉर्ड से सम्मान भी मिला।
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महिलाओं के लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार
उपासना गुप्ता मूल रूप से नारनौल निवासी हैं और शादी रेवाड़ी में हुई तो उन्होंने इसको अपना कर्म क्षेत्र बना लिया। माता-पिता अध्यापक थे तो खून में ही शिक्षा लेने व उसके प्रचार-प्रसार करने का जज्बा था। गुप्ता कहती हैं कि यदि महिला स्वावलंबी नहीं है तो समाज में तिरस्कार झेलना पड़ता है। एक बार मुकाम हासिल हो जाए तो आलोचना करने वाले भी आपकी तारीफ करने लगते हैं। उसने सामाजिक मुद्दों को उठाने के लिए ऑल इंडिया सोशल मिशन शुरू किया।
2016 से 2019 तक रहीं बाल कल्याण समिति सदस्य
घर से शुरू हुआ संघर्ष अब समाज तक पहुंच चुका था। बच्चों की आवाज उठाने के चलते ही प्रशासन की ओर से वर्ष 2016 में उपासना गुप्ता को बाल कल्याण समिति की सदस्य की जिम्मेदारी दी गई। इस दौरान दिल्ली से रेलगाड़ी में बैठकर रेवाड़ी पहुंचा एक बच्चा मिला तो उसके माता-पिता तक पहुंचने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिए। 2017 में उन्होंने खेड़ा मुरार में एक बच्चा समेत बाल मजदूरी करते हुए कुल 30 बच्चों को छुड़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महिलाओं के खिलाफ प्रताड़ना की उठाई आवाज
उपासना गुप्ता बच्चों के अलावा महिलाओं के साथ घरों से लेकर कार्य स्थलों पर होने वाली प्रताड़ना के खिलाफ भी सालों से आवाज उठा रहीं है। इसके चलते ही प्रशासन ने उनको बावल व जाटूसाना क्षेत्र में सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में महिलाओं की शिकायतों को सुनने के लिए आंतरिक कमेटी का सदस्य नियुक्त किया है। उपासना वर्तमान में भी नारनौल में बतौर किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य के रूप में कार्यरत हैं।