रेवाड़ी। शिक्षा विभाग की तरफ से चलाए जा रहे प्रवेश उत्सव अभियान का असर दिखाई देने लगा है। आंकड़ों के अनुसार जिले के 406 विद्यार्थी प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिए हैं। सरकारी स्कूलों से प्राइवेट स्कूलों में जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या केवल 69 रही।
ड्रॉपआउट रोकने और नामांकन बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल के तहत अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि अब सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर पहले से अधिक भरोसा करने बढ़ रहा है।
प्राइवेट स्कूलों में लगातार बढ़ती फीस, महंगी किताबें और अतिरिक्त खर्च अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन चुके थे। इसके अलावा, शैक्षणिक सत्र के बीच में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी भी अभिभावकों को झेलनी पड़ती थी। वहीं सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा, बेहतर आधारभूत सुविधाएं, स्मार्ट क्लास, प्रशिक्षित शिक्षक, मिड-डे मील, खेल सुविधाएं और छात्र हित की योजनाएं अभिभावकों को आकर्षित कर रही हैं।
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बच्चों को जोड़ रहा प्रवेश उत्सव अभियान
शिक्षा विभाग का प्रवेश उत्सव अभियान अब घर-घर पहुंचकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस अभियान के तहत अभिभावक बैठकें और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा पढ़ाई से जोड़ने के प्रयास अब रंग ला रहे हैं। सरकारी स्कूलों में लगातार बढ़ते नामांकन ने शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का संकेत दिया है। अभिभावक भी मान रहे हैं कि अब सरकारी स्कूल केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि बेहतर और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था में काफी सुधार हुआ
परशुराम कॉलोनी निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि सरकारी स्कूल में पहले की तुलना शिक्षा व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है इस वजह से उन्होंने अपने बेटे का दाखिला करवाया है।
अन्य अभिभावक सुनीता ने बताया कि कक्षा 8 तक उनकी बेटी निजी स्कूल में पढ़ी पता चला कि सरकारी स्कूलों में भी वह सभी सुविधाएं दी जा रही है जो सरकारी में मिल रही है। हर साल निजी स्कूलों की फीस बढ़ने से हम काफी परेशान थे।
वर्जन
जिले में सरकारी स्कूलों के प्रति भरोसा बढ़ रहा है। प्रवेश उत्सव अभियान के चलते बड़ी संख्या में बच्चे दाखिला ले रहे हैं। सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा, स्मार्ट क्लास, प्रशिक्षित शिक्षक और मिड-डे मील अभिभावकों को आकर्षित कर रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार स्पष्ट है।
-बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी।