रेवाड़ी। सड़कों पर सफेद पट्टी और सांकेतिक बोर्ड नहीं होने और लापरवाही से औसतन हर माह 24 जिंदगी मौत का ग्रास बन रही हैं। बीते 57 माह की बात करें तो जिले में सड़क दुर्घटनाओं में 1153 मौत के बाद लोगों के घरों में मातम छा गया। इतना ही नहीं इस दौरान 2456 लोग घायल भी हो चुके हैं। ठंड लगतार बढ़ती जा रही है, रात के समय पारा 10.5 डिग्री पर पहुंच चुका है। ऐसे में जल्द ही धुंध भी शुरू होने वाली है, लेकिन प्रशासन अभी तक सड़कों और दुर्घटना वाले स्थानों पर सांकेतिक बोर्ड तक नहीं लगा पाए हैं। धुंध के समय सड़क हादसों में बढ़ोतरी हो जाती है। आठ अक्तूबर को ही एडीसी ने सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सफेद पट्टी से लेकर दुर्घटना संभावित स्थानों को चिह्नित कर इंतजाम करने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। इस वर्ष सितंबर माह के दौरान 47 सड़क हादसों में 21 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 36 घायल हो गए थे।
तीन नेशनल हाईवोें पर भी सफेद पट्टी और बोर्ड गायब
जिले से तीन नेशनल हाईवे होकर गुजरते हैं, इनमें दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-48, रेवाड़ी-रोहतक एनएच-71 और एनएच-11 शामिल है। रेवाड़ी-नारनौल एनएच-11 निर्माणाधीन होने के चलते यहां पर हादसों का सबसे ज्यादा खतरा है। बाकी दो अन्य नेशनल हाईवे की भी खस्ता हालत के चलते दुर्घटनाओं की आशंका रहती है। इसके अलावा अवैध रोड कट हादसों का खतरा बन रहे हैं। लिंक रोड पर सांकेतिक बोर्ड तक नहीं हैं, जिसके कारण कहां मोड आदि हैं, कुछ पता नहीं चल पा रहा है। ऐसे हालातों में धुंध भरा सीजन वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
-ब्लैक स्पॉट
ब्लैक स्पॉट का मतलब यह है कि वह स्थान जहां तीन से अधिक हादसे हो चुके हैं। इनमें हाईवे पर बनीपुर चौक, खरखड़ा कट, साल्हावास कट, बेस्टेक मॉल, कापड़ीवास गांव के समीप, एनएच 71 का टी-प्वाइंट, एनएच 71 पर गोकलगढ़ कट, पाल्हावास कट, हरिनगर, कुंड और खोरी के समीप स्थान शामिल हैं।
-ट्रैफिक लाइट्स भी बंद
दूसरी ओर जिले में चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइट्स भी बंद पड़ी हैं। इन्हें ठीक करने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। शहर के पायलट चौक, आंबेडकर चौक, बावल चौक, नाइवाली चौक और झज्जर चौक पर लगी लाइट्स बंद पड़ी हैं। जबकि धुंध में यही लाइट्स वाहन चालकों के लिए जरूरी हैं।
-वाहनों पर रिफ्लेक्टर नहीं
धुंध भरे सीजन में वाहनों पर रिफ्लेक्टर का लगाया जाना जरूरी है। लेकिन अधिकतर वाहनों, खासकर कामर्शियल पर रिफ्लेक्टर ही नहीं हैं। रिफ्लेक्टर (रेडियम टेप) के अभाव में हादसों का डर बना रहता है। खासकर ट्रैक्टर-ट्राली वाहनों पर तो यह कहीं दिखाई ही नहीं देती।
-हाइमास्ट लाइटें बंद
अनाज मंडी टी प्वाइंट, भाड़ावास गेट, आंबेडकर चौक, रेलवे कॉलोनी, अजय नगर, कुतुबपुर और पायलट चौक पर हाइमास्ट लाइटें काफी समय से बंद पड़ी हैं। रात के समय इन स्थानों पर अंधेरा छाया रहता है, जबकि धुंध भरे दिनों में यह हादसों का कारण बन सकता है। लोगों का कहना है कि यदि यही हालात रहे तो धुंध में वाहन चालकों के लिए यह बड़ी परेशानी बनेगा।
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सड़क हादसों के आंकड़ों पर एक नजर...
वर्ष - मृत्यु - घायल
2016 - 281 - 631
2017 - 289 - 553
2018 - 311 - 501
2019 -227- 514
जनवरी से सितंबर 2020 149-257