रेवाड़ी। मौसम में आए बदलाव से वायरल के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मंगलवार को नागरिक अस्पताल में खांसी, जुकाम व बुखार की ओपीडी में अन्य दिनों के मुकाबले 400 मरीजों की बढ़ोतरी हुई। सामान्य दिनों के मुकाबले अस्पताल की ओपीडी रोजाना 1200 के करीब पहुंच रही थी। अब तक अगस्त में यह ओपीडी बढ़कर 1600 के करीब पहुंच गई। वायरल के मरीज बढ़ने से अस्पताल में भीड़ का आलम यह है कि मरीजों को पर्ची कटवाने से डॉक्टर को दिखाने तक करीब एक घंटे से अधिक समय लग रहा है। वहीं अस्पताल में मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए एक-एक महीने की तारीख दी जा रही है।
बारिश के बाद प्रतिवर्ष मच्छरों से होने वाली संक्रमित बीमारियों से लोगों को जूझना पड़ता है। अक्तूबर तक यह मौसम का प्रभाव चलता है, जिससे वायरल और मच्छर जनित बीमारियां बढ़ जाती हैं। अस्पताल में डेंगू, मलेरिया के अतिरिक्त वायरल के मरीज भी पहुंच रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन वायरल से पीड़ित करीब 150 लोगों की खून की जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है अभी तक जिले में 3 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। वहीं मलेरिया के दो केस सामने आए हैं।
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अभी तक मिल चुके हैं डेंगू के तीन और मलेरिया के 2 मरीज
जुलाई में शहर के सेक्टर-3 का एक व्यक्ति डेंगू पॉजिटिव मिला था। उसके बाद धारूहेड़ा और गिंदोखर गांव से एक-एक व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया था। अब तीनों ठीक हैं। इसके अलावा दो लोगों को मलेरिया होने की भी पुष्टि हो चुकी है। वह भी अब ठीक हो चुके हैं। राहत की बात यह है कि अगस्त में डेंगू व मलेरिया का एक भी केस नहीं मिला है। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं।
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दवाइयों की खपत 40 फीसदी बढ़ी
बारिश के बाद होने वाली बीमारियों के लिए प्रतिवर्ष स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारी की जाती है, लेकिन करीब हर घर मेें दस्तक दे चुके वायरल बुखार के चलते इस बार स्वास्थ्य विभाग को करीब 40 फीसदी अतिरिक्त दवाइयों की खरीद करनी पड़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से ओपीडी में भीड़ बढ़ती जा रही है उसे देखकर लगता है कि इस बार यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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इन दवाइयों की मांग है ज्यादा
विभिन्न प्रकार के बुखारों में काम आने वाली सिट्राजीन, पीसीएम, ओफ्लॉक्स, अजीथ्रोमाइसीन, रेनटेक एवं डाइक्लोफलेक्स जैसी दवाइयों की खपत बहुत ज्यादा है। इसके साथ बीते साल जहां पर करीब 1500 आईबी फ्लूड से काम चल जाता था, इस सीजन में इसकी डिमांड करीब ढाई हजार तक पहुंच गई है।
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लक्षणों के साथ पहुंच रहे है मरीज
वायरल से पीड़ित मरीज को तेज बुखार, सरदर्द, जोड़ों का दर्द जैसे लक्षण होते हैं। इसी के साथ मलेरिया से पीड़ित को सर्दी के साथ तेज बुखार होने के साथ बदन दर्द जैसे अनेक लक्षण पाए जाते हैं। मलेरिया में अधिक ताप होने के साथ बुखार दिमाग में चढ़ जाता है। इन लक्षणों के साथ मरीज चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।
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जिले में नहीं है खतरे वाला मलेरिया
चिकित्सक के अनुसार मलेरिया दो तरह का होता है, जिनमें एक पीवी अर्थात साधारण, जबकि दूसरा पीएफ (दिमागी बुखार) मुख्य है। पीएफ के केस में रोगी के मरने की संभावना ज्यादा होती है, लेकिन गनीमत यह है कि 2009 से जिले में दिमागी बुखार के केस नहीं आ रहे हैं।
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अभी तक 350 घरों में मलेरिया की दवाई का छिड़काव
जिले में मलेरिया के दो पीवी केस पाए जाने के बाद 350 घरों मेें दवाई का छिड़काव किया जा चुका है। डॉक्टरों के अनुसार यदि किसी एक व्यक्ति को पीवी मलेरिया पाया जाता है तो उसके पास वाले पचास घरों में दवाई का छिड़काव करना जरूरी होता है। ताकि इस मच्छर के दीवार पर बैठते ही यह मर जाए। यदि मरीज में पीएफ मलेरिया पाया जाता है तो पांच हजार की आबादी में दवाई का छिड़काव करना जरूरी होता है।
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लार्वा मिलने पर 587 लोगों को थमाया नोटिस
जिले में जुलाई व अगस्त में 24288 घरों में कूलर, पानी की टंकी व हौदी में डेंगू व मलेरिया मच्छर के लार्वा की जांच की गई। इनमें 1896 जगह मलेरिया के लार्वा पाए गए। इनमें से बड़े स्तर पर लार्वा मिलने पर 587 लोगों को नोटिस भी थमाए गए हैं, जबकि कुछ को चेतावनी दी है कि अगर सफाई नहीं रखी और लार्वा मिले तो नोटिस और जुर्माना भी लग सकता है। इतनी जगह पर मिल रहे मच्छरों के लार्वा के कारण भी फोगिंग की गति धीमी है। नगर परिषद क्षेत्र में भी फोगिंग नहीं हो रही है।
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व्यवस्था में कोई सुधार नहीं:
वायरल से पीड़ित एक व्यक्ति ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने आए थे। कई देर बाद तो नंबर आया। नंबर आया तो यहां पूरी दवाई नहीं मिली। डॉक्टर ने तीन दवा लिखी जिनमें से दो दवाई यहां मिली जबकि एक दवाई बाहर से लेनी पड़ेगी। पहले भी यहां पर कई बार आ चुका हूं, लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है।
- सिकंदर, कोनसीवास
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तीन महीने से काट रहा हूं चक्कर
जून में पेट में दर्द उठा तो पता चला कि पित्त की थैली में पथरी है। इसके बाद नागरिक अस्पताल में इसका ऑपरेशन कराने के लिए आया था, लेकिन यहां डॉक्टर ने मशीन खराब होने की बात कहकर अगली तारीख दे दी थी। तीन माह में अस्पताल के कई बार चक्कर काट चुका हूं, लेकिन डॉक्टर की तरफ से तारीख पर तारीख ही मिलती है। कोई संतुष्ट जवाब नहीं मिलता है।
- संदीप, बल्लूवाड़ा
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अधिकारी का वर्जन:
नागरिक अस्पताल में दवाइयों की कमी को पूरा कर दिया गया है। वायरल के चलते दवाइयों की खपत भी थोड़ी बढ़ गई है। कुछ एक दो दवाइयां हैं, उनको भी जल्द उपलब्ध करा दिया जाएगा। अल्ट्रासाउंड की लंबी तारीख देने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। अगर ऐसा है तो रेडियोलॉजिस्ट से बात करूंगा। इस समस्या का समाधान कराया जाएगा। अस्पताल में आने वाले हर मरीज को स्वस्थ्य करना हमारी पहली प्राथमिकता है।
- डॉ. जयभवान, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, रेवाड़ी