स्वास्थ्य विभाग ने पीपीपी मॉडल के तहत निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के साथ अनुबंध करने की योजना बनाई है। योजना लागू होने के बाद मरीजों को सरकारी खर्च पर ही निजी केंद्रों में अल्ट्रासाउंड कराने की सुविधा मिलेगी। अब मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा।
नागरिक अस्पताल में न केवल शहर बल्कि कोसली, बावल, जाटूसाना, गुरावड़ा और आसपास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से भी मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए भेजे जाते हैं। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है।
ऐसे में सामान्य मरीजों को या तो लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर मजबूरी में निजी केंद्रों पर 700 से 1500 रुपये तक खर्च कर जांच करानी पड़ती है।
दो अल्ट्रासाउंड मशीनें लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी
अल्ट्रासाउंड के लिए विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों को जांच के लिए 3 से 4 महीने तक इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण यह समस्या बनी हुई है। वर्तमान में केवल एक रेडियोलॉजिस्ट होने से प्रतिदिन 50 से अधिक अल्ट्रासाउंड करना संभव नहीं हो पाता जिससे मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची तैयार हो जाती है।
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अस्पताल में दबाव कम होने की संभावना
इस योजना के तहत केवल रेवाड़ी ही नहीं, बल्कि कोसली, बावल, नाहड़, जाटूसाना, खोल और मीरपुर क्षेत्रों में संचालित अल्ट्रासाउंड केंद्रों को भी शामिल किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को 30 से 40 किलोमीटर दूर नागरिक अस्पताल आने की परेशानी से काफी हद तक राहत मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से जहां मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिल सकेगी वहीं अस्पताल में बढ़ते दबाव को भी कम किया जा सकेगा।
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वर्जन
उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों से अनुबंध करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए संबंधित केंद्र संचालकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
- डॉ. नरेंद्र दहिया, सिविल सर्जन, रेवाड़ी