रेवाड़ी। जिले में वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए वन विभाग की ओर से राज्य योजना के तहत बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग ब्लॉकों में पौधरोपण को लेकर 6 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं। सभी टेंडरों की अंतिम तिथि 23 जुलाई निर्धारित है।
वन विभाग की योजना के अनुसार नाहड़, गढ़ी बोलनी, झाबुआ, बावल, जाटूसाना, रेवाड़ी, खोल और धारूहेड़ा ब्लॉकों में राज्य योजना के तहत नए पौधे लगाए जाएंगे।
जारी टेंडरों के अनुसार बावल ब्लॉक में सबसे अधिक 1.20 करोड़ रुपये की लागत से पौधरोपण किया जाएगा। रेवाड़ी ब्लॉक में 1.16 करोड़ रुपये, जाटूसाना, खोल और धारूहेड़ा ब्लॉकों में 80-80 लाख रुपये की लागत से पौधरोपण होगा। नाहड़, गढ़ी बोलनी और झाबुआ में 40-40 लाख रुपये की लागत से पौधे लगाए जाएंगे।
स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे ताकि उनकी जीवित रहने की संभावना अधिक रहे। योजना के तहत जिले के सरकारी संस्थानों कॉलेज, आईटीआई और सरकारी स्कूलों के परिसर में पौधरोपण किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों और कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश मिलेगा। संवाद
देखरेख के अभाव में नष्ट हो जाते हैं 50 फीसदी पौधे
जिले में हर वर्ष बारिश के मौसम में दो लाख पौधे रोपे जाते हैं लेकिन देखरेख के अभाव में 50 फीसदी पौधे नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष पौधरोपण के बाद भी जिले में अपेक्षित हरियाली नहीं आई। पिछले वर्ष 2 लाख से अधिक पौधे पार्कों, स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, विभिन्न सेक्टरों, पंचायतों में बांटे गए थे। सभी पौधे रोपे गए लेकिन देखरेख न होने के कारण 50 प्रतिशत पौधे नष्ट हो चुके हैं। पार्कों व सार्वजनिक स्थलों पर पौधरोपण किया गया था। इन पौधों को नर्सरी में तैयार करने पर भी काफी खर्च आता है।
जिले में सिर्फ 10 प्रतिशत वन क्षेत्र : कमल
राष्ट्रीय पर्यावरण प्रकृति संरक्षण एवं संवर्धन संस्था के संयोजक कमल सिंह यादव ने बताया कि जिले में सिर्फ 10 प्रतिशत वन क्षेत्र है जबकि भारतीय वन नीति 1988 व हरियाणा सरकार वन नीति 2006 के अनुसार भू-भाग के 33 प्रतिशत पर वन होना चाहिए। आंकड़ों के अनुसार जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्र 1594 वर्ग किलोमीटर में 3.96% वन आवरण क्षेत्र है। कृषि वानिकी सेवा के तहत किए गए पौधरोपण को बचाना व बढ़ाना जरूरी है। पानी के अभाव में सफेदा पॉपुलर, मालाबार नीम, बैकेन, शहतूत के पेड़ कामयाब नहीं हो पाते हैं। जो पेड़ यहां के वातावरण के अनुरूप हैं वह दीर्घायु के पेड़ हैं जिन्हें विकसित होने में कम से कम 30-40 वर्ष का समय लग जाता है। इनमें खेजड़ी, जाल, रोहेड़ा, फ्रांस, लेहसुआ, धोंक, रोझ, खैरी, बेरी इंदरजौ इत्यादि शामिल हैं। इन प्रजातियों के वृक्षों को बचाना बहुत जरूरी है। रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, दादरी, भिवानी, कुछ भाग झज्जर व गुरुग्राम जिलों में लगभग 5-6 लाख स्थानीय प्रजातियों के वृक्ष हैं।
इन ब्लॉकों में पौधरोपण के टेंडर
ब्लॉक अनुमानित लागत
नाहड़ 40.3 लाख
गढ़ी बोलनी 40.3 लाख
झाबुआ 40.3 लाख
बावल 1.20 करोड़
जाटूसाना 80.7 लाख
रेवाड़ी 1.16 करोड़
खोल 80.6 लाख
धारूहेड़ा 80.6 लाख
वर्जन
जिले में हरियाली बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए टेंडर लगाए जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों, कॉलेजों के परिसर में पौधे रोपे जाएंगे।-साहिथि रेड्डी, डीएफओ रेवाड़ी।