रेवाड़ी। आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों के लिए जिले के सरकारी ट्रॉमा सेंटर में अब तक चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इससे मरीजों का उपचार राम भरोसे है।
लगभग दस लाख की आबादी वाले जिले में बनाया गया एकमात्र सरकारी ट्रॉमा सेंटर है। यहां दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीजों व अन्य गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों को सामान्य प्राथमिक उपचार के बाद सीधे हायर सेंटर रेफर करने तक सीमित रह गया है। हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को तुरंत उपचार देने के लिए बनाए गए ट्रॉमा सेंटर में न तो चिकित्सकों की नियुक्ति हो पाई और न ही यहां पर घायलों के लिए सबसे जरूरी इंसेंटिव केयर यूनिट (आईसीयू) उपलब्ध है। ऐसे में यहां आने वाले प्रतिदिन औसत 12 घायलों में से सात को रोहतक पीजीआई रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है।
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नागरिक अस्पताल के सहारे चल रहा ट्रॉमा सेंटर
ट्रॉमा सेंटर को स्थापित हुए करीब एक दशक बीत चुका है, मगर यहां पर न्यूरो सर्जन, जनरल सर्जरी, न्यूरोलोजिस्ट, आर्थोपेडेशियन, रेडियोलॉजिस्ट सहित विभिन्न पद रिक्त हैं। सेंटर को स्थापित हुए एक दशक से अधिक समय हो चुका है। यहां आज भी नागरिक अस्पताल के स्टाफ के सहारे चल रहा है।
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सभी 14 पद अभी भी हैं रिक्त
ट्रॉमा सेंटर को बने हुए 12 साल से अधिक हो चुका है, लेकिन आज तक भी यहां न्यूरो सर्जन की नियुक्ति नहीं हो पाई है। बगैर न्यूरो सर्जन के ट्रॉमा सेंटर को चलाना संभव ही नहीं है। यहां घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार भी मुश्किल से मिल पाता है। तैनात चिकित्सकों का काम बस इतना होता है कि मेडिकल लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) काटकर बस मरीज को रेफर कर दिया जाता है। जिले में कहीं भी हादसा होता है तो घायल को पहले ट्रॉमा ही लाया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार ट्रॉमा सेंटर में स्वीकृत सभी 14 पद रिक्त हैं।
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ये पद हैं रिक्त
कैटेगरी पद खाली
न्यूरोसर्जन 01
न्यूरोलॉजिस्ट 01
आर्थोपेडिशियन 02
जनरल सर्जरी 02
एनेस्थेटिक 02
रेडियोलॉजिस्ट 02
मेडिकल अफसर 04
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कुल पद : 14
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कोट
ट्रॉमा सेंटर का निर्माण घायलों को जल्द और बेहतर उपचार देने के लिए किया जाता है। घायलों में ज्यादा रक्तस्त्राव होने से जान का खतरा होता है। ऐसे में यहां आए घायलों को ऑक्सीजन व अन्य सुविधाओं के लिए आईसीयू में रखा जाता है। सेंटर में अभी 14 रिक्त पद हैं। सरकार द्वारा जल्द ही नियुक्ति होने के बाद इन पदों को भरा जाएगा। फिलहाल कोशिश यही है कि मरीजों को किसी तरह की कोई असुविधा न हो। इसलिए नागरिक अस्पताल का स्टाफ पूरा सहयोग दे रहा है।
-डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, रेवाड़ी।