धारूहेड़ा में बदहाल स्थिति में राजीव गांधी ग्रामीण खेल परिसर। संवाद
धारूहेड़ा। वर्ष 2006 में युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बना राजीव गांधी खेल परिसर बदहाली का शिकार है। स्टेडियम का ट्रैक टूटा है। कोच की नियुक्ति नहीं हुई है। इससे अपेक्षित खिलाड़ी नहीं तैयार हो रहे हैं।
राजीव गांधी खेल परिसर का शिलान्यास 1 अगस्त 2006 को हुआ था और 23 जनवरी 2011 को इसका निर्माण पूरा हुआ। शुरुआत में यहां खिलाड़ियों की अच्छी संख्या रहती थी लेकिन समय के साथ सुविधाओं की कमी और रखरखाव के अभाव ने इसकी स्थिति खराब कर दी।
वर्तमान में खेल परिसर में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है। दौड़ का ट्रैक जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। खिलाड़ियों के लिए न तो पेयजल की समुचित व्यवस्था है और न ही शौचालय उपयोग योग्य स्थिति में हैं। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण परिसर की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
खिलाड़ियों के अनुसार पहले खेल विभाग की ओर से नियुक्त प्रशिक्षक के नेतृत्व में धारूहेड़ा और आसपास के गांवों से प्रतिदिन 100 से अधिक युवा दौड़, डिस्कस थ्रो, जेवलिन थ्रो सहित विभिन्न खेलों का अभ्यास करने आते थे। प्रशिक्षक के तबादले के बाद नए कोच की नियुक्ति नहीं हुई, जिससे खिलाड़ियों की संख्या लगातार घट गई। यहां अभ्यास करने वाले कई खिलाड़ी जिला और राज्य स्तर पर पदक भी जीत चुके हैं।
जिला खेल अधिकारी बोले- जल्द शुरू होगी प्रक्रिया
जिला खेल अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि भविष्य में खेल परिसर में प्रशिक्षक की नियुक्ति की उम्मीद है। इसके अलावा स्टेडियम की मरम्मत के लिए बजट तैयार कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।