रेवाड़ी। कभी घर-आंगन में फुदकने वाली गौरेया वर्तमान में विलुप्ति की कगार पर है, लेकिन कुछ पर्यावरण प्रेमी इनके संरक्षण के लिए अनूठी पहल कर रहे हैं।
शहर के साथ ही गांवों में भी कई जगह पर्यावरण प्रेमियों ने अपने घर के बरामदे हो या फिर टीनशेड बरामदे हर जगह इनका बसेरा बनाया हुआ है। गांव चिमनावास निवासी राजकुमार पेशे से कंपनी में बतौर मैकेनिक कार्यरत हैं। वह पिछले एक दशक से पर्यावरण के साथ ही पक्षियों के संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। अपने खुद के पैसे खर्च कर वे गांव में या कोई अन्य किसी सगे संबंधियों के घर में कोई शुभ अवसर या शादी समारोह में घोंसले भेंट करने पहुंच जाते हैं। मंदिरों में भी घोंसले भेंट करते हैं। मिशन गौरेया के साथ बाकी पक्षियों को बचाना है। पर्यावरण मित्र राजकुमार ने बताया कि चिड़ियों के लिए दाना-पानी का खास ध्यान रखें। उनके लिए बाजरा, गेहूं का पिसा हुआ दलिया, बूंदी के लड्डू का चूरा व अन्य रसोई में आने वाले उत्पाद भी रख सकते हैं।
गौरेया को बचाने में भी काफी मिलेगी मदद : निर्मल कुमार
गांव निमोठ निवासी निर्मल कुमार ने बताया कि कोरोना काल में जब सब लोग घरों में थे, उस समय बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए दाने-पानी की दिक्कत हो गई थी। तब से उन्होंने यह पहल करते हुए पक्षियों के लिए घर में लकड़ी के घोंसले बनवाकर लटकाए। उनके घर में 15 से ज्यादा घोंसले लगे हुए हैं। 100 से ज्यादा घोंसले बांटे भी हैं। इसी प्रकार अपने घर से 500 मीटर दूर बणी में सीमेंट का होद बनाकर उसमें पानी भी भरते हैं, ताकि पशु-पक्षी पानी पीकर अपनी प्यास बुझा सकें। उन्होंने बताया कि इनके घोंसले ऐसी जगह लगाएं, जो कुत्ते, बिल्ली व कौए के अलावा बड़े पक्षियों की पहुंच से दूर हो। इससे गौरेया को बचाने में भी काफी मदद मिलेगी।
शिक्षक दंपती ने घर में जगह-जगह लगाएं बर्ड हाउस
शहर के सेक्टर-4 निवासी शिक्षक अजीत कुमार व उनकी पत्नी सरला ने घर के मेन प्वाइंट को बर्ड हाउस का रूप दे दिया है। घर में घुसते ही काफी पौधे लगे हुए हैं। साथ ही हरियाली देखने लायक है। दिल्ली में कार्यरत शिक्षक अजीत ने बताया कि वह पिछले 7 साल से इस कार्य में लगे हुए हैं। घर के मेन प्वाइंट पर जहां 15 से ज्यादा घोंसले लगे हुए हैं, जिनमें चिड़ियाओं का आश्रय है। इसी तरह पौधे भी लगाए हुए हैं। उनके लिए दाना-पानी भी रखते हैं।
झाबुआ रिजर्व फॉरेस्ट में भी पक्षियों के लिए तैयार की गईं 5 झोपड़ियां
वाइल्ड लाइफ विभाग की ओर से झाबुआ रिजर्व फॉरेस्ट में भी 5 बंद झोपड़ियों का निर्माण कराया गया है। इन झोपड़ियों में इनके रहने के लिए घोंसले बनाए गए हैं। बंद झोपड़ियों के बनने से इनको कौअे व अन्य बड़े पक्षियों से बचाया जा सकता है। अब इनमें गौरेया ने धीरे-धीरे बसेरा बनाना शुरू कर दिया है।
ऐसे तैयार करें घोंसले
कागज के गत्ते हो या फिर जूते के खाली बॉक्स को काटकर उनके रस्सी बांधकर उनको घर की टीन शेड या ऐसे स्थान पर लटकाएं जहां कुत्ते, बिल्ली, कौअे या अन्य बड़े पक्षी नहीं पहुंच सके। बॉक्स को तार से बांध भी दें, ताकि वह खुल नहीं सके। उनमें एक छेद भी करें, ताकि चिड़ियां उनमें से आ जा सके। आसपास घास-फूस भी डालें, क्योंकि चिड़िया घोंसले में घास-फूस स्वयं ले जाती हैं। इस तरह हम घोंसले बनाकर इनका संरक्षण कर सकते हैं।
लोगों को चिड़िया का घोंसला भेंट करते पर्यावरण मित्र राजकुमार। स्रोत : पर्यावरण प्रेमी