कोसली। 68 ग्राम पंचायतों से अधिक को मिलाकर लोगों को सुविधा दिलाने के मकसद से बनाया गया मिनी सचिवालय में पानी तक भी नसीब नहीं हो पा रहा है। तीन मंजिला इमारत में बनाए गए शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि इनमें शौच करना तो दूर इनके पास से गुजरने के लिए लोगों को मुंह को कपड़े से ढकना पड़ता है।
एक तरफ प्रशासन लोगों को सफाई रखने के लिए प्रचार प्रसार करते नहीं थकता। वहीं सचिवालय में जगह जगह कूड़ा फैला रहता है। यहां तक लोग खुलेआम धूम्रपान भी करते रहते हैं। सचिवालय के परिसर में फैले कूड़े और शौचालयों की सफाई करवाने की जिम्मादारी एसडीएम की बनती है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में मिनी सचिवालय व एसडीएम कार्यालय स्वयं विकास की बाट जोह रहा है। इसके चलते कर्मचारियों के अलावा आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उसके बावजूद प्रशासन इस और बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा है। रोजाना 2000 से अधिक लोग सचिवालय में आते हैं।
सचिवालय में हर मंजिल पर बने शौचालयों की सफाई काफी समय से नहीं हुई। इसके कारण शौचालयों में गंदगी से लोगों ने शौच जाना बंद कर दिया है। सचिवालय में महिलाओं का भी आना-जाना लगा रहता है। तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री व अन्य काम से आए लोगों को अक्सर पूरा दिन रुकना पड़ता है।
इंसेट
1989 में कोसली को सब डिवीजन बनाने की दी थी मंजूरी
प्रदेश सरकार ने वर्ष 1989 में विकास करने के मकसद से कोसली को सब डिवीजन बनाने की मंजूरी दी थी। मंजूरी के बाद एक अच्छा खासा भवन बनाया गया, जिसमें सब डिवीजन लेवल के सभी विभागों के कार्यालय स्थापित किए गए। उस समय क्षेत्र की जनसंख्या भी कम थी। इसके लिए मौजूदा सुविधा प्रर्याप्त थी। साढ़े तीन दशक बीत जाने पर आबादी में कई गुना इजाफा हो चुका है। इसके हिसाब से वर्तमान सुविधाएं कम पड़ रही हैं।
बैठने की सुविधा है कम
सचिवालय में विभिन्न कार्यालयों में आने वाले लोगों के बैठने की व्यवस्था का अभाव बना है। कार्यालय में आमजन के बैठने की सुविधाएं भी नहीं है। कर्मचारियों ने अपनी सुविधा के लिए भवन के अंदर जरूर पीने के पानी की व्यवस्था कर रखी है,लेकिन वहां अपनी प्यास बुझाने के लिए आम आदमी पहुंच ही नहीं पाता है।
सचिवालय में सफाई कर्मचारियों की कमी है। इस वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। फिलहाल सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए निर्देश दिए जाएंगे।
- जितेंद्र कुमार, तहसीलदार, कोसली
रेवाड़ी। कोसली स्थित मिनी सचिवालय में शौचालय की खस्ताहाल स्थिति। संवाद