संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। इंडियन नेशनल स्टूडेंट आर्गनाइजेशन (इनसो) के जिलाध्यक्ष युगल यादव ने कहा कि फार्मासिस्टों की कमी से अस्पतालों में दवाओं के वितरण सहित अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले प्रदेश सरकार ने फार्मासिस्ट पदों पर आवेदन मांगे थे, लेकिन हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद उस भर्ती प्रक्रिया को रोक लगा दी गई। पूर्व में भरे गए आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। इसका मुख्य कारण नियमों में शामिल 6 माह के प्रशिक्षण की अनिवार्यता बताया गया है, जिसे लेकर आवेदकों ने आपत्ति जताई थी।
युगल यादव ने स्पष्ट किया कि डी-फार्मा और बी-फार्मा जैसे पाठ्यक्रमों में 6 माह का कोई अलग से प्रशिक्षण नहीं होता है। डी-फार्मा में भी केवल 3 माह का प्रशिक्षण शामिल होता है, जिससे अधिकांश छात्र पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं कर सके।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोर्स के दौरान 6 माह का प्रशिक्षण अनिवार्य नहीं था और न ही इस बारे में कोई जानकारी दी गई थी, तो ऐसे में परीक्षार्थी प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र कहां से लाएं।
उन्होेंने स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों में यथोचित संशोधन कर प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जाए, ताकि प्रदेश के अस्पतालों में फार्मासिस्टों की कमी को दूर किया जा सके और आम जनता को सुचारू स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस विषय में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो इनसो संगठन आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होगा।