संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जनस्वास्थ्य विभाग ने पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए अनूठी पहल की है। इसके तहत एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत रोपे गए पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी जाएगी। इसके लिए समूह की महिलाओं को ढाई हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय भी दिया जाएगा।
जन स्वास्थ्य विभाग ने अभियान के तहत लिसाना के जल शोधन संयंत्र परिसर में 300, धारूहेड़ा के जल शोधन संयंत्र परिसर में 131 पौधे, धारूहेड़ा के मल शोधन संयंत्र परिसर में 250 और बावल के मल शोधन संयंत्र परिसर में 150 पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है।
पूरे जिलेभर में 831 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इन पौधों की एक वर्ष तक देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी जाएगी। इसके लिए उन्हें मानदेय भी दिया जाएगा।
इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महिला सशक्तीकरण भी होगा। महिलाएं न केवल पौधों की देखभाल करेंगी, बल्कि इससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा।
जिले में विभाग की ओर से पौधरोपण के लिए अलग-अलग साइट्स तय किए गए हैं जहां उपलब्ध जगह के हिसाब से पौधरोपण का लक्ष्य भी तय किया है। विभाग ने एसटीपी और डब्ल्यूटीपी प्लांटों का चयन पौधरोपण के लिए किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बने जल घरों और बूस्टिंग स्टेशनों का भी चयन किया गया है। जनस्वास्थ्य विभाग की अमृत मिशन योजना के तहत इस पहल में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
पर्यावरण संरक्षण में महिलाएं निभाएंगी अहम भूमिका
इस पहल का उद्देश्य न केवल पौधरोपण करना है , बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण को भी सुनिश्चित करना है। महिलाओं को पौधे लगाने से लेकर उनके विकसित होने तक की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे कि वे पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। प्रत्येक महिला को 25 पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इन पौधों की देखरेख महिलाएं एक साल तक करेंगी।
वर्जन
जनस्वास्थ्य विभाग की तरफ से पौधरोपण के लिए चार एसटीपीटी व डब्ल्यूटीपी का चयन किया गया है। इस पहल से विभाग ने पर्यावरण संरक्षण व महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है।-योगेंद्र परमार, जिला सलाहकार जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग