संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिस स्कूल में राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षक पढ़ाते हों...वहां पढ़ाई को लेकर सीना गर्व से तन जाता है। मगर, गांव बुड़ौली के राजकीय प्राथमिक पाठशाला व मिडिल स्कूल की हकीकत ऐसी है कि बारिश आते ही गुरुजी भी सिहर उठते हैं। कारण यह कि छतों से टिप-टिप टपकते पानी के बीच ही पाठशालाएं लगानी पड़ती हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित सतपाल सिंह को बच्चे ही नहीं, बड़े भी बेहद सम्मान के भाव से देखते हैं। उनके मिडिल स्कूल में कुल 100 बच्चे पढ़ते हैं। यह भवन जर्जर हो चुका है और कमरों की हालत खस्ता।
बारिश का मौसम आते ही बच्चे से लेकर शिक्षक तक दहशत में जीते हैं। मिडिल स्कूल के कमरों से जगह-जगह से पानी टपकता है। फिर बच्चों को जहां-तहां बैठाना पड़ता है। स्कूल मुखिया ने स्कूल की मरम्मत के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार लिखा लेकिन फायदा कुछ न हुआ। प्राइमरी स्कूल की स्थिति भी दयनीय ही है। यहां कुल चार कमरे हैं। इनसे भी पानी टपकता है। कुछ कमरों की दीवारों में दरारें भी आ चुकी हैं। प्लास्टर भी उखड़ रहा है। इससे स्कूल में पढ़ने वाले 70 बच्चे और उनके माता-पिता अनहोनी की आशंकाओं से डरे रहते हैं।
प्राइमरी स्कूल का रिपोर्ट कार्ड
विद्यार्थियों की संख्या 70
शिक्षकों के स्वीकृत पद 4
कार्यरत शिक्षक 4
पढ़ने के लिए कमरे 4
शौचालय 3
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स्कूल भवन के जर्जर कमरों की मरम्मत तुरंत शुरू करनी चाहिए। दुर्भाग्य से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अफसर बच्चों के भविष्य से खेल रहे हैं। यह किसी भी सूरत उचित नहीं है। -सतीश, सरपंच, बुडौली।