रेवाड़ी। न्यायालय के आदेश के बाद छात्र का नाम पोर्टल से स्कूल ने हटा दिया है। अब छात्र को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
गांव संगवाड़ी निवासी राजेश कुमार के पुत्र को लेकर चल रहा शैक्षणिक विवाद आखिरकार न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद सुलझ गया है। राजेश का पुत्र पहली और दूसरी कक्षा तक बाल विकास विद्यालय रेवाड़ी में पढ़ता था।
दूसरी कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसके पिता ने स्कूल प्रबंधन को पहले ही सूचित कर दिया था कि अगले सत्र में वे बच्चे का दाखिला किसी अन्य विद्यालय में करवाएंगे। उन्होंने स्कूल द्वारा मांगी गई सभी देय फीस का भुगतान भी कर दिया था।
इसके बावजूद जब अभिभावकों ने स्कूल से स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट मांगा तो उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा। वर्ष 2024 में बच्चे का अस्थायी दाखिला राजकीय स्कूल संगवाड़ी में करवा दिया गया, लेकिन पूर्व विद्यालय द्वारा पोर्टल से नाम न हटाने के कारण नए स्कूल में बच्चे को मिड-डे मील, पुस्तकों व अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया।
राजकीय स्कूल प्रबंधन भी सर्टिफिकेट जमा कराने का दबाव बनाता रहा। अभिभावकों ने कई बार बाल विकास विद्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगाए लेकिन समाधान नहीं निकला। फिर सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश चंद से संपर्क किया गया।
कैलाश चंद ने 21 जुलाई 2025 को जिला न्यायालय में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान निजी स्कूल ने फीस बकाया होने का दावा किया जबकि अभिभावक पक्ष ने तर्क दिया कि किसी भी बच्चे को जबरन स्कूल में रोके रखने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्कूल को निर्देश दिए कि छात्र का नाम तत्काल प्रभाव से पोर्टल से हटाया जाए। इसके अनुपालन में 15 फरवरी को बच्चे का नाम हटा दिया गया। इसके बाद राजकीय स्कूल संगवाड़ी ने भी अपने पोर्टल पर नाम दर्ज कर लिया।