रेवाड़ी। खेलों को बढ़ावा देने और ग्रामीण स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने के उद्देश्य से सरकारी स्कूलों, ग्राम पंचायतों तथा निजी शिक्षण संस्थानों में खेल नर्सरियां स्थापित होंगी। आवेदन के लिए 22 फरवरी को अंतिम दिन था। जिले में अब तक 170 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।
अब तक आए आवेदनों का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि कुछ खेलों के प्रति संस्थानों ने अपेक्षित रूचि नहीं दिखाई है। आर्चरी, कैनोइंग, स्विमिंग, जिम्नास्टिक, ताइक्वांडो, जूडो और टेनिस जैसे खेलों की नर्सरी स्थापित करने के लिए बहुत कम या लगभग न के बराबर आवेदन आए हैं।
इसके विपरीत पिछले वर्ष की तरह इस बार भी कुश्ती, एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, फुटबॉल, कबड्डी, हैंडबॉल, हॉकी और बॉक्सिंग जैसे पारंपरिक एवं लोकप्रिय खेलों के लिए अधिक रूचि देखने को मिली है। आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब प्रत्येक खेल के लिए प्रशिक्षकों की एक कमेटी गठित की जाएगी।
यह कमेटी संबंधित संस्थानों में पहुंचकर फिजिकल वेरिफिकेशन करेगी। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि जिस खेल की नर्सरी के लिए आवेदन किया गया है, उस खेल का योग्य कोच उपलब्ध है या नहीं। साथ ही खिलाड़ियों की संख्या कितनी है तथा खेल से संबंधित बुनियादी सुविधाएं और संसाधन मौजूद हैं या नहीं।
सभी बिंदुओं की जांच कर रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर अंतिम सूची जारी की जाएगी। विभाग का प्रयास है कि केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित न रहकर ओलंपिक, एशियन और कॉमनवेल्थ खेलों में शामिल विभिन्न विधाओं को भी बढ़ावा दिया जाए।
इच्छुक संस्थानों को 22 फरवरी तक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करने का अवसर दिया था।खेल विभाग का मानना है कि खेल नर्सरियों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण देने का मार्ग प्रशस्त होगा।
- ममता देवी, कार्यवाहक जिला खेल अधिकारी
गत वर्ष 34 नर्सरियां थीं संचालित
जिले में वर्ष 2025 में ग्राम पंचायतों व सरकारी स्कूलों में कुल 50 नर्सरियां अलॉट हुईं थीं। इनमें से 16 नर्सरियां शुरूआती दिनों में ही बंद हो गई थी। उन नर्सरियों में खिलाड़ियों की संख्या पूरी नहीं होने के साथ ही अन्य खामियां थीं। इसके बाद सिर्फ 34 नर्सरियां ही संचालन में थी। बड़ी बात है कि इन 34 के साथ सरकारी सेंटर लगाकर कुल 50 नर्सरियां चल रही थी। इनमें 1200 से ज्यादा खिलाड़ी ट्रेनिंग ले रहे थे। हालांकि, खिलाड़ियों को इस साल के लगभग 9 माह का खुराक भत्ता अब तक नहीं मिला है। खिलाड़ियों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नर्सरियों के संचालक भी खिलाड़ियों के खुराक भत्ते की मांग कर चुके हैं।