जिला अस्पताल हो या अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टरों की कमी के चलते तीमारदार मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने से कतरा रहे हैं। यही कारण है बीते दो साल की तुलना करें तो नागरिक अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या 2204 कम हो गई, जबकि इसी दौरान ओपीडी अर्थात परामर्श के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में 18352 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऐसे में स्पष्ट है कि परामर्श केंद्र तक की स्वास्थ्य सेवाओं में जहां लोगों का विश्वास बढ़ा, वहीं अभी भी मजबूरी में ही लोगों को सरकारी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। इसका बड़ा कारण अस्पताल में डॉक्टर व सहायक स्टाफ की कमी है।
100 बेड के नागरिक अस्पताल में ओपीडी के लिए वर्ष 2018 में 3,59,645 व 2019 में 3,77,997 मरीज पहुंचे, वहीं आईपीडी अर्थात भर्ती होने वाले मरीजों की बात करें तो 18 में 47,135 व 19 में 44,931 लोगों का अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया गया। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के लिए 85 पोस्ट प्रस्तावित है, जबकि कार्यरत महज 52 हैं। ऐसे में 33 डॉक्टरों की कमी का खामियाजा जरूरतमंद मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञ बगैर 9 साल से अनुपस्थित
शहर में नाम कमाने के लिए कुछ डॉक्टर नागरिक अस्पताल में बतौर एमओ ज्वाइन कर लेते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद ही शहर में अपना निजी अस्पताल शुरू कर देते हैं। निजी अस्पताल चलाना कोई गलत नहीं है, लेकिन त्यागपत्र की प्रक्रिया पूरी नहीं करने के चलते नागरिक अस्पताल में इन डॉक्टरों को अनुपस्थित दिखाया जाता है। ऐसे में इनके स्थान पर नए डॉक्टर भी भर्ती नहीं हो पाते हैं। यदि ये डॉक्टर त्यागपत्र दें तो बांड के अनुसार इनको स्वास्थ्य विभाग के पास 25 लाख रुपये की राशि जमा करानी पड़ती है, इससे बचने के लिए त्याग पत्र नहीं दिया जाता है। नागरिक अस्पताल की बात करें तो एक एमओ एक फरवरी 2011 से अनुपस्थित चल रहा है, अर्थात 9 साल से उसके स्थान पर अस्पताल खाली पोस्ट नहीं दिखा पा रहा है। एसे में कुल 6 विशेषज्ञ चिकित्सक लगातार अनुपस्थित चल रहे हैं, जबकि इन चिकित्सकों की ओर से शहर में ही अस्पताल चलाए जा रहे हैं।
कोसली नागरिक अस्पताल में 65 फीसदी डॉक्टर व स्टाफ नर्स की कमी
50 बेड वाले कोसली नागरिक अस्पताल के हालात कहीं ज्यादा खराब हैं। यहां पर डॉक्टर व स्टाफ नर्स की 65 प्रतिशत पोस्ट खाली हैं। आंकड़ों के अनुसार कोसली में मेडिकल ऑफिसर( एमओ) के 11 पद प्रस्तावित हैं, लेकिन यहां पर महज 4 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। स्टाफ नर्स स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ की हड्डी कहलाती हैं, लेकिन कोसली में 17 की बजाय महज 4 नर्स ही कार्यरत हैं।
जल्द ही सुधार देखने को मिलेगा : डॉ. माही
प्रश्न- स्वास्थ्य सेवाओं पर आखिर विश्वास क्यों नहीं बढ़ पा रहा है?
उत्तर- कुछ दिन पहले ही जिला में बतौर सिविल सर्जन का कार्यभार संभाला है, सभी सीएचसी व पीएसी की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। पहले के मुकाबले व्यवस्थाएं बदली हैं, जल्द ही और सुधार देखने को मिलेगा।
प्रश्न- रात के समय मरीजों को रेफर कर दिया जाता है?
उत्तर- रेफर करने के ढर्रे को बदला जा रहा है, मौजूद संसाधनों से बेहतर उपचार का प्रयास होना चाहिए, जरूरी होने पर रेफर करना होता है। यदि बेवजह रेफर किया गया तो अब कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न- ट्रॉमा सेंटर के हालात कुछ ज्यादा अच्छे नहीं हैं?
उत्तर- एक ही हड्डी रोग विशेषज्ञ होने के चलते कुछ परेशानी थी, अब एक अन्य डॉक्टर की नियुक्ति की गई है, अब रात के समय भी दुर्घटनाग्रस्त लोगों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
-प्रश्न- डॉक्टर की कमी कब पूरी हो पाएगी?
उत्तर- नागरिक अस्पताल 100 से बढ़ाकर 200 बेड का हो चुका है, ऐसे में जल्द ही यहां पर डॉक्टरों की नियुक्ति शुरु होगी, इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सकेगा।